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निर्यात पर रोक लगाने का असर, एशियाई देशों को रुला रहा भारतीय प्याज, दोगुने हुए दाम

निर्यात पर रोक लगाने का असर, एशियाई देशों को रुला रहा भारतीय प्याज, दोगुने हुए दाम

हाईलाइट

  • बांग्लादेश और श्रीलंका में दोगुनी हुई प्याज की कीमतें
  • भारत ने बीते वित्त वर्ष में 22 लाख टन प्याज निर्यात किया था
  • मानसून की लंबी खेंच के कारण बढ़े प्याज के दाम

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली। भारत की ओर से प्याज के निर्यात पर रोक लगाने का असर एशियाई देशों पर पड़ने लगा है। इन देशों में अब प्याज दोगुने भाव में बिक रहा है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दिसंबर 2013 के बाद सबसे अधिक दाम पर बिक रहा है। यहां प्याज की कीमत 120 टका यानी 100 रुपए किलो पहुंच गई है। भारत के निर्यात पर रोक से पहले करीब 15 दिन पहले यही प्याज ढाका में 50 रुपए किलो के भाव में बिक रहा था। वहीं श्रीलंका में भी एक सप्ताह के भीतर प्याज की कीमतों में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। ​श्रीलंका के प्रमुख शहरों में प्याज की 300 श्रीलंकाई रुपए (117 भारतीय रुपए) प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

मांग ज्यादा होने से नहीं हो पा रही भरपाई
बीते वित्त वर्ष में भारत की ओर से दुनियाभर में 22 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया था। इसमें से आधे से भी ज्यादा निर्यात एशियाई देशों में किया गया था। भारतीय प्याज के निर्यात पर रोक के बाद बांग्लादेश ने म्यांमार, ईजिप्ट, तुर्की और चीन से सप्लाई बढ़ाई है। लेकिन, भारतीय प्याज पर निर्भरता इतनी ज्यादा है कि भरपाई करना मुश्किल होगा।

भारतीय प्याज पर निर्भर एशियाई देश
चीन और ईजिप्ट जैसे देशों के मुकाबले भारत से निर्यात में कम समय लगने की वजह से एशियाई देश भारतीय प्याज पर ज्यादा निर्भर हैं। बांग्लादेश के कारोबारियों का कहना है कि दूसरे देश भारतीय प्याज पर रोक का फायदा उठा रहे हैं। वे ज्यादा कीमत मांग रहे हैं। ईजिप्ट से सप्लाई में 1 महीना और चीन से 25 दिन लगते हैं। इनके मुकाबले भारत से प्याज आने में काफी कम समय लगता है।

भारत सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए उठाया कदम
ज्ञात हो​ कि देश में लगातार बढ़ रही प्याज की कीमतों के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने तत्काल प्रभाव से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जो अब भी जारी है। प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के अनुसार सभी किस्म के प्याज पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

डीजीएफटी आयात और निर्यात से संबंधित मुद्दों को देखता है। इससे पहले 13 सितंबर को डीजीएफटी ने प्याज के निर्यात पर अंकुश के लिए 850 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) तय किया था। इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में प्याज कीमतों पर अंकुश लगाना था। दिल्ली और देश के कुछ अन्य हिस्सों में प्याज 60 से 80 रुपए प्रति किलोग्राम के दर से बिक रहा है।

इस कारण बढ़े प्याज के दाम
महाराष्ट्र जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में बाढ़ की वजह से इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारतीय बाजार में मौजूदा समय में प्याज की कीमतें पिछले 4 सालों की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। खपत के मुकाबले आवक कम होने से प्याज की कीमतें बढ़ रही हैं। प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में मानसून की भारी बारिश से आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस वजह से इसकी कीमतों में उछाल आया है। मौसम विभाग के अनुसार प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में पिछले दो दिन में अत्यधिक बारिश हुई है।

व्यापारियों का कहना है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में अभी भंडारण वाला प्याज बेचा जा रहा है। खरीफ या गर्मियों की फसल नवंबर से बाजार में आएगी। इस बीच भारतीय उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से 50,000 टन प्याज निकाला है। सरकार ने पिछले महीने चेताया था कि प्याज की जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आयात विकल्पों पर किया जा रहा विचार
मौजूदा संकट को देखते हुए बांग्लादेश सरकार सस्ती दरों पर प्याज बेच रही है। सरकारी कंपनी ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ बांग्लादेश के प्रवक्ता हुमायूं कबीर कहना है कि आयात के सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। कम से कम समय में प्याज मंगवाने का लक्ष्य है।

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