दैनिक भास्कर हिंदी: आंतकी हाफिज सईद के पर कतरने की तैयारी, मदरसों और स्वास्थ्य शिविरों पर कार्रवाई

February 14th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आतंकियों के पनाहगार देश पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर भी अब कुछ हद तक पाकिस्तान पर होता नजर आने लगा है। मुंबई हमले का मास्टरमाइंड और संगठन जमात-उद-दावा का सरगना हाफिज सईद के पर कतरने की तैयारी पाकिस्तान कर रहा है। पाकिस्तान ने ये कदम फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की पेरिस में होने जा रही बैठक से ठीक पहले उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने हाफिज के मदरसों और स्वास्थ्य शिविरों को खत्म करना शुरू कर दिया है। बता दें कि भारत-अमेरिका के दबाव के चलते हाल ही में पाकिस्तान ने एंटी टेरेरिज्म एक्ट में भी बदलाव किया है।

पंजाब सरकार ने दिए आदेश
आतंक के आंका हाफिज सईद के संगठनों पर चंदा लेने पर रोक लगाने के बाद अब पाकिस्तान ने हाफिज के मदरसों और स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्रवाई की है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक इस सिलसिले में पंजाब सरकार ने आदेश दिए थे। रावलपिंडी जिला प्रशासन ने हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा (JUD) और फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन (FIF) के एक मदरसे और चार दवाखानों को अपने नियंत्रण में ले लिया। चारों मदरसे को धार्मिक संपत्तियों को नियंत्रित करने वाले विभाग औकाफ को सौंप दिया गया है।

4 मदरसों की एक सूची प्रशासन को सौंपी
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'प्रांत की सरकार ने रावलपिंडी में चार मदरसों की एक सूची प्रशासन को सौंपी है। प्रशासन की टीम इन मदरसों में गईं, लेकिन जेयूडी ने इन मदरसों के साथ कोई संबंध होने से इनकार किया है।' उन्होंने कहा कि सरकार ने जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि वह मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों और शिक्षकों का ब्योरा दे। उन्होंने बताया कि सरकार ने ब्योरों की जांच के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और औकाफ विभाग की एक संयुक्त दल गठित की है। वहीं उन्होंने कहा कि अटक, चकवाल और झेलम जिलों में भी इस तरह का अभियान जलाया जाएगा। हालांकि पर्यवेक्षकों का मानना है जेयूडी के कार्यालयों को नियंत्रण में लेना सरकार के लिए आसान नहीं है।

इस वजह से उठाया कदम
पेरिस में 18 से 23 फरवरी तक 'फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स' (FATF) की बैठक होने जा रही है। खबरों में कहा गया है कि अमेरिका और भारत कोशिश कर रहे हैं कि पाकिस्तान को इंटरनेशनल मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग लिस्ट में शामिल किया जाए। FATF की इस लिस्ट में पाकिस्तान को पिछली बार फरवरी 2012 में डाला गया था और वह तीन साल तक इस लिस्ट में रहा था। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इसी वजह से इस तरह के कदम उठा रहा है।

एंटी टेरेरिज्म एक्ट में बदलाव
पाकिस्तान ने हाल ही में अपने एंटी टेरेरिज्म एक्ट में भी अहम बदलाव किया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने एक ऐसे अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की ओर से प्रतिबंधित व्यक्तियों और लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और तालिबान जैसे संगठनों पर लगाम लगाना है। भारत और अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे कई देश भी पाकिस्तान पर दबाव डाल रहे थे कि वो आतंकियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए। अमेरिका ने तो पाकिस्तान को दी जाने वाली मिलिट्री एड भी रोक दी है।