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विदेशी राजनयिकों को एलओसी तक लेकर गया पाकिस्तान

October 22nd, 2019 17:30 IST
 विदेशी राजनयिकों को एलओसी तक लेकर गया पाकिस्तान

हाईलाइट

  • विदेशी राजनयिकों को एलओसी तक लेकर गया पाकिस्तान

इस्लामाबाद, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में तैनात विदेशी राजनयिकों के एक दल ने भारत से लगी नियंत्रण रेखा (एलओसी) का दौरा किया है। उन्हें पाकिस्तान सरकार ने एलओसी तक भेजा। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह दुनिया को दिखाना चाहती है कि भारत का यह दावा गलत है कि नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में उसकी सेना ने चार आतंकवादी लॉन्च पैड नष्ट किए हैं।

पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिकों को भी टीम के साथ चलने का न्योता दिया था, लेकिन भारतीय उच्चायोग ने स्वाभाविक रूप से ठुकरा दिया।

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने मंगलवार को बताया कि पाकिस्तान में तैनात कई विदेशी राजनयिकों और मीडियाकर्मियों को आजाद कश्मीर (पीओके) की नीलम घाटी ले जाया गया, ताकि वे खुद ही देख सकें कि क्या भारत ने कोई आतंकी लॉन्च पैड नष्ट किए हैं, जैसाकि उसने रविवार को दावा किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनयिकों को एलओसी के पास नौसेरी, शाहकोट और जुरा सेक्टरों का दौरा कराया गया और साथ ही नौसादा गांव ले जाया गया, जिसे भारतीय सेना के हमले में काफी नुकसान पहुंचा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स (आईएसपीआर) के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर ने राजनयिकों और मीडियाकर्मियों को इलाके की स्थिति की जानकारी दी।

गफूर ने बताया कि विदेशी राजनयिक जुरा बाजार भी गए और उन्होंने वहां के स्थानीय लोगों से मुलाकात की। राजनयिकों ने उन क्षतिग्रस्त दुकानों और घरों को देखा जिन्हें ही भारत आतंकी लॉन्चपैड बता रहा है। गफूर ने कहा कि भारत के हमले का शिकार केवल निर्दोष आम लोग बने हैं।

इससे पहले भारतीय राजनयिक के टीम के साथ नहीं होने पर गफूर ने ट्वीट में कहा कि भारतीय उच्चायोग के स्टाफ में अन्य राजनयिकों के साथ एलओसी तक जाने का नैतिक साहस नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फैसल ने भी एक ट्वीट में कहा कि भारतीय पक्ष ने हमारे साथ न तो दौरा किया न ही लॉन्चपैड के बारे में कोई जानकारी दी। ऐसे में भारतीय सेनाध्यक्ष का लॉन्च पैड नष्ट करने का दावा महज एक दावा ही बनकर रह गया है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के इस प्रोपेगेंडे में भारत के शामिल होने का कोई सवाल नहीं उठता, इसलिए किसी भारतीय राजनयिक के लिए पाकिस्तान के न्योते पर एलओसी तक जाने का कोई औचित्य ही नहीं था।

बालाकोट में जब भारत ने आतंवादियों के ठिकाने नष्ट किए थे, तब भी पाकिस्तान ने इसी तरह की दिखावटी कार्रवाइयां कर उसे नकारने की कोशिश की थी। जबकि, बालाकोट के आतंकी शिविरों पर भारतीय हमले के पक्ष में सैटेलाइट इमेज समेत कई प्रमाण थे।

इसी तरह पीओके में भी भारतीय तोपों ने उन आतंकवादियों के ठिकानों को रविवार को नष्ट कर दिया, जहां भारत में तबाही फैलाने की साजिशें रची जा रही थीं और आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था। भारत की इस कार्रवाई में कम से कम छह से दस आतंकवादी और करीब इतने ही पाकिस्तानी सैनिक ढेर हो गए थे। इन ध्वस्त लॉन्च पैड की तस्वीरों के साथ हमले की सच्चाई को दुनिया ने देखा था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।