कैसे चलेगा देश? : पाकिस्तान के पास नहीं है पैसे, पीएम इमरान ने कहा- कर्ज में डूब चुका है मुल्क, लोग नहीं समझते कि टैक्स चोरी करना बुरी चीज है

November 25th, 2021

हाईलाइट

  • 6 हज़ार ट्रिलियन से कर्ज 10 सालों में बढ़कर 30 ट्रिलियन हो गया है

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि, उनके पास देश चलाने के लिए पैसे नहीं है और उनके मुल्क पर कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया है। लोगों के बीच टैक्स देने का कल्चर नहीं है और वो इसे चोरी कर रहे है,जो बुरी चीज है। उन्हें इस बात की समझ नहीं है।

बता दें कि, बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को इस्लामाबाद में एक समारोह को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के पीएम ने देश के टैक्स कल्चर और बढ़ते कर्ज को लेकर बात की, जिसमें उन्होंने बताया कि, ''हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि अपने मुल्क को चलाने के लिए उतना पैसा नहीं है. इसकी वजह से हम क़र्ज़ लेते हैं।''

टैक्स कल्चर को लेकर क्या कहा
पीएम इमरान ने टैक्स कल्चर पर बात करते हुए कहा कि, जब हम आजाद हुए उस वक्त सत्ता पर बैठे लोगों ने टैक्स कल्चर को बढ़ावा नहीं दिया और न ही लोग इसे लेकर जागरुक हुए। उस वक्त सत्ता में बैठे लोगों की जिंदगी देखकर आम जनता को लगा कि, अगर उन्होंने टैक्स भरा तो, वो पैसा सत्ताधारियों की जेब भरेगा।

कर्ज पर पीएम ने क्या कहा
पाकिस्तान में बढ़ते कर्ज को लेकर पीएम इमरान खान ने कहा कि, देश में 6 हज़ार ट्रिलियन से कर्ज 10 सालों में बढ़कर 30 ट्रिलियन हो गया है। पीएम कहते है कि, न हमारे देश में कोई बड़ा काम हुआ, न डैम बना, न  इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर बड़ा काम किया गया तो, आखिर ये पैसा गया कहा। इतने कर्ज की वजह से आम जनता के लिए हम कोई पैसे खर्च नहीं कर पा रहे है। हमारी सरकार लगातार टैक्स कलेक्शन पर काम कर रही है और रिकॉर्ड स्तर पर टैक्स कलेक्ट हुआ है। हम उम्मीद कर रहे है कि आने वाले समय में 6 हजार अरब का टैक्स कलेक्शन होगा। लेकिन, 6 हजार अरब में 3 हजार अरब हमें किस्तें चुकानी होंगी और 22 करोड़ की बचत होगी, जिसमें से हमें स्कूल, अस्पताल और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना होगा। जो कि पर्याप्त नहीं है। इसलिए कर्ज लेना पड़ेगा।

इमरान सरकार ने किए बदलाव 
पीएम इमरान खान ने कहा कि, हमने देश में बदलाव लाने के लिए बहुत सी चीजों को पेपरलेस किया,जिससे आवाम को फायदा हुआ और करप्शन में कमी आई। पाकिस्तान टैक्स संग्रह में जिस तेज़ी से बढ़ रहा है, उस हिसाब से हम आठ हज़ार अरब तक पहुँच जाएंगे। लेकिन, कुल लोग जो पुराने सिस्टम के जरिए अपना निजी फायदा उठा रहे है वो बदलाव नहीं आने देना चाहते है। इसलिए जब हमने यूटिलिटी स्टोर के अंदर बिल को ऑटोमैटिक किया तो वो कोर्ट चले गए है और ऑटोमेशन नहीं होने दिया। सरकार के पास पैसे नहीं आ रहे है। लेकिन, लोगों के पास आ रहे है।