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PCOD को ना समझें आम समस्या, जानिए कैसे रखनी है सावधानी

November 21st, 2018 15:42 IST
PCOD को ना समझें आम समस्या, जानिए कैसे रखनी है सावधानी

डिजिटल डेस्क । जब लड़कियां बड़ी होती है उनमें रिप्रॉडक्शन के बदलाव आने लगते है तब उनमें कई तरह के हार्मोनल चेंजिस आने लगते हैं। जब महिलाएं रिप्रॉडक्शन की उम्र में पहुंचती है तब बहुत सी लड़कियों और महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन के कारण PCOD नाम की बीमारी हो जाती है। हालंकि यह बीमारी क्यों होती है अब तक इसका मुख्य कारण पता नहीं चल पाया है लेकिन इसके जेनेटिक कारक भी हो सकते हैं। अपनी डायट पर भी नियंत्रण करके इस बीमारी से बचा जा सकता है। हम आपको ऐसे फूड आइटम्स के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आपको अपनी डायट से बाहर कर देना चाहिए।

क्या होता है PCOD?

PCOD/PCOS यानि 'पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर' या 'पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम'। इसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन androgen का स्तर बढ़ जाता है परिणामस्वरूप ओवरी में सिस्ट्स बनने लगते हैं। यह आश्चर्य की बात है की इस बीमारी के होने का आजतक कोई कारण पता नहीं चला है और यह अभी भी शोध का विषय है, परंतु चिकित्सकों का मानना है कि यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव के कारण उत्पन्न होती हैं। साथ ही यह जैनेटिकली भी होती है। शरीर में अधिक चर्बी होने की वजह से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है,जिससे ओवरी में सिस्ट बनता है। वर्तमान में देखें तो हर दस में से एक प्रसव उम्र की महिला इसका शिकार हो रही हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जो महिलाएं तनाव भरा जीवन व्यतीत करती हैं उनमें पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है।
 

आर्टिफिशल स्वीटनर्स

जो महिलाएं हॉर्मोनल समस्याओं से जूझ रही हैं,उन्हें ब्लड शुगर की भी समस्या होती है। ऐसे में मीठी चीजों से दूरी बनाना बहुत जरूरी है। बहुत सी महिलाएं आर्टिफिशल स्वीटनर्स का भी इस्तेमाल करती हैं जिससे वेट बढ़ने की समस्या सामने आकर खड़ी हो जाती है। वेट बढ़ने पर आगे चलकर हॉर्मोनल समस्या और बढ़ जाती है जो PCOD के मरीजों के लिए सही नहीं है।


रेड मीट

हम में से बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रोटीन-पैक्ड डायट PCOD में फायदेमंद होता है लेकिन बहुत से डायटिशिन्स का मानना है कि इस बीमारी के समय रेड मीट अवॉइड करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा रेड मीट खाने से सेक्स हॉर्मोन के प्रॉडक्शन में समस्या आती है जो कि टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम करने के लिए बहुत जरूरी होता है। कभी-कभी इस परिस्थिति में PCOD की रिकवरी में ये खतरनाक साबित हो जाता है।


वेजिटेबल ऑइल

अगर आपको PCOD की समस्या है तो आपको वेजिटेबल ऑइल से बनी चीजों से दूरी बनाने की जरूरत है क्योंकि इसमें ओमेगा 6 फैटी ऐसिड होता है। वेजिटेबल ऑइल की जगह आप कोकोनट ऑइल, ऑलिव ऑइल, ऐवकाडो ऑइल का इस्तेमाल आप कर सकती हैं।


ग्लूटन

ग्लूटन को हॉर्मोन को बिगाड़ने वाला माना जाता है और ये हॉर्मोन सिस्टम के फंक्सन में बाधा डालता है।ये हार्मोन की नकल कर सकता है जिससे कि हमारी बॉडी गलत समय पर ओवर या कम हार्मोंस रिलीज करती है। अगर आप PCOD से पीड़ित हैं तो आपको ऐसे फूड आइटम से दूरी बनानी पड़ेगी जिसमें ग्लूटन पाया जाता है।


सोया

कई शोधों की माने तो सोया थॉयराइड के फंक्शन और ऑव्यूलेशन को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इसके अलावा इसमें ऐसे कम्पाउंड भी पाए जाते हैं जो आपकी ऐस्ट्रोजेन के नॉर्मल फ्ंकशन को प्रभावित करते हैं जिससे की आपका मेंस्ट्रुअल साइकिल प्रभावित होता है और जो आगे चलकर PCOD का भी कारण बन सकता है।


डेयरी

डेयरी भी ग्लूटन की ही तरह होता है,इसलिए आपको ऐसे प्रॉडक्ट्स को अवॉइड करने की जरूरत होती है । वैसे बटर को हेल्दी फैट का अच्छा स्त्रोत माना जाता है,इसलिए आपको इसे अवॉइड करने की जरूरत नहीं है।


 

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