comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

अनियमित पीरियड्स से हैं परेशान तो जरूर खाएं ये पांच फूड

July 24th, 2018 18:49 IST

डिजिटल डेस्क । अनियमित पीरियड ज्यादातर महिलाओं और लड़कियां की समस्या है। बदलते दौर और दिनचर्या के साथ ये परेशानी अब हर चौथी स्त्री को होने लगी है। अनियमित पीरियड्स के लिए लड़कियां दवाइयों के साथ-साथ और न जाने क्या-क्या ट्राई नहीं करतीं, इनके फायदे होने की बजाए इनके नुक्सान होने लगते है। आगे चलकर बेबी कंसीव करने या गर्भाशय में कैंसर, ट्यूमर और इन्फेक्शन जैसी समस्या होने लगती है। इस  समस्या से बचने के लिए जब आप डॉक्टर के पास जाते है तो वो भी आपको पहले बेहतर खान पान की सलाह देती हैं।आज हम आपको कुछ फूड आइटम्स के बारे में बताएंगे, जिन्हें खाने से अनियमित पीरियड्स की प्रॉब्लम सुलझ जाएगी। 

हल्दी

हल्दी को स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना गया है। घावों और जलन को ट्रीट करने के लिए यह सबसे बेहतर है, लेकिन अनियमित पीरियड्स के लिए भी यह काफी उपयोगी है। दरअसल हल्दी में ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो हॉर्मोंस को रेग्युलेट करते हैं और पीरियड्स को नियमित बना देते हैं।

हल्दी के लिए इमेज परिणाम

अदरक

अगर आपके पीरियड्स अभी तक नहीं आए हैं, लेट हो गए हैं, तो फिर अदरक से बेहतर कुछ नहीं। अदरक में ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स और ऐंटी-इन्फ़्लेमेटरी प्रॉपर्टीज़ होती हैं, जो अनियमित पीरियड्स को ठीक करने में मदद करती हैं।

अदरक के लिए इमेज परिणाम

​मछली

पीरियड्स सही तरह से नहीं आ रहे हैं तो इस समस्या को सुलझाने के लिए मछली है न। मछली में प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा होती है। इसके अलावा इसमें हेल्दी फैट और ओमेगा3 फैटी ऐसिड्स भी होते हैं। omega 3 fatty acids इन्फ़्लेमेशन को कम करने में मदद करते हैं, जोकि दर्द और सूजन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।

​मछली के लिए इमेज परिणाम

पार्स्ले

पार्स्ले फूड को गार्निश करने के लिए ही यूज़ नहीं होता है, बल्कि यह पीरियड्स की समस्या को भी सॉल्व करने में मदद करता है। पुराने ज़माने में पार्स्ले को पानी में उबालकर पीरियड्स की समस्या को सुलझाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

पार्स्ले के लिए इमेज परिणाम

​​पपीता

पपीता को अनियमित पीरियड्स के लिए बेस्ट माना जाता है। अगर आपको पीरियड्स कम हो रहे हैं या फिर मिस हो गए हैं, तो पपीपा उस स्थिति के लिए कारगर है। इसलिए रोज़ाना पपीपा खाएं।

​​पपीता के लिए इमेज परिणाम

कमेंट करें
nwS7f
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।