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NIA ने 16 संदिग्धों को किया गिरफ्तार, आतंकी हमलों को अंजाम देने की थी तैयारी

NIA ने 16 संदिग्धों को किया गिरफ्तार, आतंकी हमलों को अंजाम देने की थी तैयारी

हाईलाइट

  • एनआईए ने शुक्रवार को 14 संदिग्ध आतंकियों की पहचान की है
  • न सभी को इस हफ्ते यूएई से डिपोर्ट किया गया था
  • 14 संदिग्धों के साथ, दो अन्य को भी गिरफ्तार किया गया है

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को 16 संदिग्ध आतंकियों की पहचान की है। इन सभी को इस हफ्ते यूएई से डिपोर्ट किया गया था। अलकायदा, इस्लामिक स्टेट और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया की विभिन्न विचारधाराओं से ये लोग जुड़े है। सभी को आठ दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया है। सभी 16 संदिग्ध तमिलनाडु के हैं।

एनआईए ने आरोप लगाया कि वे अंसारुल्ला नामक एक आतंकवादी ग्रुप बनाने के लिए एक साथ आए थे। ये लोग भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करना चाहते थे। इसके लिए इन्होंने फंड इकट्ठा किया था और इससे आतंकवादी हमलों को अंजाम देने की तैयारी की थी। ग्रुप के सदस्य चाकू, वाहन और जहर का उपयोग कर लोन-वुल्फ हमलों को अंजाम देने के लिए दूसरों को प्रेरित कर रहे थे।

एनआईए ने एक बयान में कहा, 'आरोपी सक्रिय रूप से भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए लोगों की भर्ती कर रहे थे। ये लोग नियमित रूप से वीडियो और अन्य जिहादी प्रचार सामग्री भी सोशल मीडिया के जरिए पोस्ट कर रहे थे, ताकि उनके समर्थकों को विस्फोटक, जहर, चाकू और वाहन के उपयोग से आतंकवादी हमले करने के लिए प्रेरित कर सके।' एनआईए ने दावा किया कि इस मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया है।

सिक्यॉरिटी इस्टेब्लिशमेंट के सूत्रों ने कहा कि संदिग्धों को यूएई से दो बैटों में डिपोर्ट किया गया था। पहले बैच में 7 संदिग्ध 13 जुलाई को और दूसरे बैच में 7 संदिग्धों को 15 जुलाई को डिपोर्ट किया गया था। पकड़े गए संदिग्धों को एक विशेष उड़ान के जरिए चेन्नई ले जाया गया जहां उन्हें एक अदालत में पेश किया गया।

यूएई से डिपोर्ट किए गए इन लोगों की पहचान 58 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम, मीरान घानी (33), गुलाम नबी असथ (37), रफी अहमद (55), मुंतशिर (39), उमर बरोक (48), फ़ारूक (26), मोहम्मद शेख मैथेन (40), अहमद अजरुद्दीन (27), तौफीक अहमद (27), मोहम्मद इब्राहिम (36), मोहम्मद अफज़र (29), मोहिदीन सेनी शाहुल हमीद (59) और फैज़ल शरीफ (44) के रूप में की गई है।

यह संदेह है कि ये लोग तमिलनाडु में इस्लामी संगठन, वहादत-ए-इस्लामी हिंद से जुड़े हुए हैं। पिछले हफ्ते एनआईए ने अंसारुल्लाह की गतिविधियों की जांच के सिलसिले में तमिलनाडु में तीन लोगों के परिसरों पर छापे मारे। उनमें से एक चेन्नई निवासी सैयद बुखारी था, जो वहादत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष भी हैं। इसके बाद एजेंसी ने नागापट्टिनम के दो व्यक्तियों - हसन अली और हरीश मोहम्मद - को गिरफ्तार किया।

पिछले हफ्ते आरोपियों के निवास और आधिकारिक परिसर में तलाशी के दौरान, एनआईए ने नौ मोबाइल फोन, 15 सिम कार्ड, सात मेमोरी कार्ड, तीन लैपटॉप, पांच हार्ड डिस्क, छह पेन ड्राइव, दो टैबलेट और तीन सीडी/डीवीडी जब्त करने का दावा किया। इसके अलावा पत्रिकाओं, बैनर, नोटिस, पोस्टर और पुस्तकों सहित कुछ दस्तावेज़ भी जब्त किए गए।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।