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दिल्ली में बढ़ेंगी बीटेक की 360 और एमटेक की 72 सीटें

September 01st, 2020 19:30 IST
 दिल्ली में बढ़ेंगी बीटेक की 360 और एमटेक की 72 सीटें

हाईलाइट

  • दिल्ली में बढ़ेंगी बीटेक की 360 और एमटेक की 72 सीटें

नई दिल्ली, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार ने नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसयूटी) में दो नए परिसरों के विस्तार का निर्णय लिया है। इसके साथ ही चौधरी ब्रम्ह प्रकाश राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज (जाफरपुर) और अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (गीता कॉलोनी) को एनएसयूटी से जोड़ा जाएगा।

एनएसयूटी से जुड़ने के बाद दोनों संस्थानों में शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में सर्वागीण विकास होगा। इस विलय से बीटेक में 360 तथा एमटेक में 72 अतिरिक्त सीटें बढ़ जाएंगी।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, दोनों कॉलेजों को एनएसयूटी की प्रतिष्ठा और संसाधनों का लाभ मिलेगा। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एनएसयूटी का गौरवशाली इतिहास है। इसका शैक्षणिक कौशल और उद्योग जगत के साथ संबंध भी काफी महत्वपूर्ण है। एनएसयूटी के कारण दोनों कॉलेजों को समुचित विकास का अवसर मिलेगा।

सिसोदिया ने इस नई शुरूआत के लिए एनएसयूटी द्न दोनों कॉलेजों को बधाई देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा देने के लिए लगातार प्रयासरत है।

इस विस्तार के बाद जाफरपुर स्थित वेस्ट कैंपस में सिविल, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और मेकेनिकल इंजीनियरिंग की स्पेशलाइज्ड पढ़ाई होगी। इसी तरह, गीता कॉलोनी स्थित ईस्ट कैंपस में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस की स्पेशलाइज्ड पढ़ाई होगी।

गौरतलब है कि एनएसयूटी में जेईई (मेन्स) परीक्षा के जरिए नामांकन होता है। इसलिए विस्तार के बाद इन परिसरों में भी जेईई परीक्षा के माध्यम से प्रवेश लिया जाएगा। इसके कारण नामांकित छात्रों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

दिल्ली सरकार के मुताबिक वर्तमान में इन दोनों कॉलेजों के आईटी छात्रों को प्लेसमेंट पैकेज मात्र 3.5 से 6.5 लाख रुपए तक मिलता है। जबकि एनएसयूटी के स्टूडेंट्स को औसतन 11.5 लाख का पैकेज मिलता है और अधिकतम पैकेज 70 लाख तक जाता है।

इस निर्णय से कई प्रशासनिक जटिलता भी कम होंगी। जैसे, शिक्षकों की नियुक्ति, वित्तीय निर्णय लेने की गति, स्वायत्तता की कमी। अभी दोनों संस्थानों में नियमित शिक्षकों की कमी है। नियुक्ति प्रक्रिया धीमी होने और अदालत में कुछ मामले लंबित होने के कारण ये जटिलता है। वर्तमान में दोनों कॉलेज संविदा या गेस्ट फैकल्टी के जरिए अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। स्थायी शिक्षकों के अभाव के कारण तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों के साथ सपोर्ट स्टाफ के मामले में भी यही स्थिति है। इन दोनों कॉलेजों में रिक्त एवं स्वीकृत पदों के लिए एनएसयूटी के नियमों के अनुसार नियुक्ति होगी।

दोनों कॉलेजों के वर्तमान स्टूडेंट्स को उनके प्रवेश के समय निर्धारित फीस का ही भुगतान करना होगा। उन्हें जीजीएसआइपी विश्वविद्यालय द्वारा ही डिग्री दी जाएगी। नए नामांकित छात्रों को एनएसयूटी के तहत डिग्री मिलेगी। नए छात्रों की फीस का निर्धारण एनएसयूटी प्रबंधन बोर्ड करेगा।

जीसीबी/एएनएम

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।