comScore

लक्षद्वीप के नए ड्राफ्ट पर 93 पूर्व सिविल सर्वेंटों ने जताई गहरी चिंता, पीएम मोदी को पत्र लिखकर इसे वापस लेने को कहा

June 06th, 2021 15:58 IST
लक्षद्वीप के नए ड्राफ्ट पर 93 पूर्व सिविल सर्वेंटों ने जताई गहरी चिंता, पीएम मोदी को पत्र लिखकर इसे वापस लेने को कहा

हाईलाइट

  • 93 पूर्व सिविल सर्वेंटों के एक ग्रुप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा
  • केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की
  • पूर्व सिविल सर्वेंटों ने प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के फैसलों को वापस लेने की अपील की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 93 पूर्व सिविल सर्वेंटों के एक ग्रुप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इसमें कहा गया है कि ‘विकास’ के नाम पर वहां जो कुछ हो रहा है, वह परेशान करनेवाला है। उन्होंने प्रधानमंत्री से लक्षद्वीप के नागरिकों के साथ मिलकर उपयुक्त डेवलपमेंट मॉडल तैयार करने का आग्रह किया है, जिसमें सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा और अच्छी शासन प्रणाली समेत अन्य चीजें शामिल हों। 

कॉन्स्टीट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप ने जो लेटर लिखा है उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं है। उनका विश्वास निष्पक्षता और भारत संविधान के प्रति प्रतिबद्धता में है। इसमें ये भी कहा गया है कि जो कदम उठाए गए हैं, उनसे विकास की नहीं, बल्कि मनमुताबिक नीति निर्माण की बू आती है और यह उस परंपरागत प्रक्रिया का उल्लंघन करते हैं, जो लक्षद्वीप के समाज और यहां के पर्यावरण का सम्मान करती है। 

लक्षद्वीप के लोगों से सलाह लिए बिना प्रशासक द्वारा उठाए गए इन कदमों और बहुत दूर तक असर डालने वाले प्रस्तावों से लक्ष्यद्वीप के समाज, अर्थव्यवस्था और भौगोलिक परिदृश्य के बुनियादी धागे पर प्रहार होता है। ऐसा लगता है जैसे यह द्वीप सिर्फ पर्यटकों और बाहरी दुनिया के निवेशकों के लिए रिएल एस्टेट का एक टुकड़ा हो। लेटर के जरिए पूर्व सिविल सर्वेंटों ने प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के फैसलों को वापस लेने की अपील की है।

बता दें कि प्रफुल पटेल ने लक्षद्वीप के नए प्रशासक का पदभार 5 दिसंबर 2020 को संभाला है। उन्होंने 28 मार्च 2021 को नया ड्राफ्ट पेश किया था। इनमें बीफ़ बैन, पंचायत चुनाव में उन लोगों के लड़ने पर पाबंदी, जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, लोगों की गिरफ़्तारी, शराब से बैन हटाने और भूमि अधिग्रहण से जुड़े नए नियम शामिल हैं। ये सभी अभी ड्राफ़्ट हैं, जिन्हें अगर गृह मंत्रालय की मंज़ूरी मिल जाए, तो ये क़ानून की तरह लागू हो जाएंगे।

लक्षद्वीप एक केंद्र शासित प्रदेश है, यहां कोई विधानसभा नहीं है। राज्य की कमान राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त प्रशासक के हाथों में होती है। प्रफुल पटेल पर लक्षद्वीप के लोग "वहां की संस्कृति, रहने, खाने के तरीक़ों को नुक़सान पहुंचाने और बेवजह डर फैलाने" की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि हाल के कई प्रस्तावित नियम "लोकतांत्रिक मर्यादा के ख़िलाफ़" हैं।

हालांकि प्रफुल पटेल ने कहा है कि सब कुछ नियमों के मुताबिक़ हो रहा है और विरोध के स्वर केरल से अधिक उठ रहे हैं। उनका कहना है कि लक्षद्वीप में सिर्फ़ वहीं लोग विरोध कर रहे हैं, जिनका कोई निहित स्वार्थ है। बता दें कि लक्षद्वीप की संस्कृति में केरल की झलक देखने को मिलती है। यहीं वजह है कि केरल विधानसभा में सभी दलों ने लक्षद्वीप में उठाए गए कदमों के विरोध में प्रस्ताव भी पारित किया था।

कमेंट करें
Ely4C
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।