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प्रणब मुखर्जी के RSS के कार्यक्रम में शामिल होने पर बोले ओवैसी ‘कांग्रेस खत्म’

June 09th, 2018 18:47 IST

हाईलाइट

  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नागपुर में RSS के कार्यक्रम में शामिल हुए।
  • AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने निशाना साधते हुए कहा ‘कांग्रेस खत्म हो गई है’
  • हैदराबाद में एक कार्यक्रम में ओवैसी ने कहा- क्या आपको अभी भी कांग्रेस से उम्मीद बची है।

डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर AIMIM के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पर करारा हमला किया है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा 'कांग्रेस खत्म हो गई है।' इतना ही नहीं आगे उन्होंने कहा जो व्यक्ति ने 50 साल तक कांग्रेस में रहा और देश का राष्ट्रपति भी रह चुका है वो आरएसएस के कार्यालय तक पहुंच गया। क्या अब भी आप लोग इस पार्टी से उम्मीद करते हैं। हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने ये सब बातें कहीं। 

वहीं पीएम मोदी को भी आड़े हाथों लेते हुए ओवैसी ने कहा कि देश में नफरतें बढ़ रही हैं। देश में गाय के नाम पर मुस्लिमों की हत्या की जा रही है। जब से मोदी पीएम बने हैं गाय के नाम पर हत्या हो रही है। सांप्रदायिक दंगों में 24 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। देश में नफरत का माहौल भरा जा रहा है। 

गौरतलब है कि आरएसएस की आलोचना करने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कड़े विरोधों के बीच 7 जून को नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के उनके फैसले पर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताते हुए, फिर विचार करने की भी अपील की थी। यहां तक कि उनकी बेटी ने भी उन्हें संघ के कार्यक्रम में न जाने की नसीहत दी थी, लेकिन प्रणब मुखर्जी ने अपने कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया।

वह नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल हुए इतना ही नहीं विजिटर डायरी में संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के बारे में लिखा कि वो भारत माता के महान सपूत थे। हालांकि कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के संबोधन के बाद कांग्रेस ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति का संबोधन RSS को सीख थी। प्रणब मुखर्जी ने संघ को सच का आईना दिखाया है और मोदी सरकार को भी राजधर्म सिखाया है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा प्रणब मुखर्जी ने बहुलतावाद, सहिष्णुता और बहुसंस्कृति की बात कही, लेकिन क्या संघ सुनने के लिए तैयार है? 
 

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