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‘खालिस्तान के लिए रेफरेंडम-2020 की मांग के पीछे है ISI का हाथ’

August 13th, 2018 09:32 IST
‘खालिस्तान के लिए रेफरेंडम-2020 की मांग के पीछे है ISI का हाथ’

हाईलाइट

  • अकाली दल के नेता बोले- खालिस्तान समर्थित आंदोलन के पीछे ISI का हाथ।
  • ब्रिटेन में कुछ सिख समुदाय के लोगों ने भारत से अलग खालिस्तान की मांग के लिए किया प्रदर्शन।
  • एमएस बिट्टा ने कहा है- खालिस्तान न कभी बना था, न बनेगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व पीएम इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और शिरोमणी अकाली दल के नेता नरेश गुजराल ने भारत से पृथक खालिस्तान की मांग के लिए ब्रिटेन में चल रहे सिख समुदाय के प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस प्रदर्शन के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ बताया है। गुजराल ने कहा है, 'यह पंजाब को अस्थिर करने की एक कोशिश है। यह पूरा प्रदर्शन ISI स्पॉन्सर है। पाकिस्तान और ISI बड़े लंबे समय से पंजाब में समस्या खड़ी करने की कोशिश करते रहे हैं। वे कश्मीर में फेल हो गए हैं, इसलिए अब पंजाब उनके निशाने पर है।'
 


गुजराल ने यह भी कहा कि सिख समुदाय के महज कुछ ही लोगों ने ही इस तरह के प्रदर्शन में भाग लिया है। उन्होंने कहा, 'ब्रिटेन में खालिस्तान के समर्थन में जो कुछ हुआ उसका भारतीय सिखों से कोई लेना-देना नहीं। भारतीय सिख अपने देश के प्रति वफादार है और यहां के सिखों को खालिस्तान के लिए आंदोलन चलाने वालों से कोई हमदर्दी नहीं है।' गुजराल ने यह भी कहा कि अन्य समुदाय के मुकाबले सिख समुदाय ने अपने देश के लिए सबसे ज्यादा त्याग और कुर्बानियां दी है।
 


गौरतलब है कि रविवार (12 अगस्त) को लंदन में कुछ सिख समुदाय के लोगों ने भारत से अलग खालिस्तान की मांग के लिए प्रदर्शन किया था। पिछले 6 महीने से कुछ अलगाववादी, भारत के सिख समुदाय के लिए अलग से खालिस्तान बनाए जाने की मांग के लिए रेफरेंडम 2020 का अभियान चला रहे हैं। इस साल ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर भी स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान समर्थित नारे लगाए गए थे।

खालिस्तान के समर्थन में पिछले कुछ समय से उठ रही आवाजों पर ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के चेयरमैन एमएस बिट्टा ने कहा है कि खालिस्तान न कभी बना था, न बनेगा। उन्होंने कहा, 'देश एक है। पंजाब हमेशा से भारत का एक अभिन्न हिस्सा रहा है और आगे भी रहेगा। ISI इन सब के पीछे है। यह खुलासा भी हो चुका है। भारत के लोग ISI की इस साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे।'

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।