comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

अब मोबाइल पर नहीं सुनाई देगी अमिताभ बच्चन की कॉलर ट्यून, जानिए वजह

अब मोबाइल पर नहीं सुनाई देगी अमिताभ बच्चन की कॉलर ट्यून, जानिए वजह

हाईलाइट

  • बिग बी की आवाज वाली कॉलर ट्यून हटाने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में लगाई थी याचिका
  • कॉलर ट्यून में असली कोरोना वॉरियर की आवाज होने की मांग की गई थी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अब आपको मोबाइल पर अमिताभ बच्चन की आवाज में ‘दो गज दूरी मास्क है जरूरी’ वाली कॉलर ट्यून नहीं सुनाई देगी। इसका कारण ये है कि शुक्रवार से आप किसी को फोन करेंगे तो कोरोना टीकाकरण से जुड़ी कॉलर ट्यून सुनाई देगी। ये नई कॉलर ट्यून हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही होगी और ये जसलीन भल्ला की आवाज में होंगी।

...तो इसलिए बदली गई कॉलर ट्यून
ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार अब कोरोना वैक्सीन के प्रति जागरूकता फैलना चाहती है इसीलिए आवाज को बदला गया है। नई कॉलर ट्यून में लोगों को टीके को लेकर जागरूक किया जाएगा और संदेश दिया जाएगा कि वो किसी भी तरह की अफवाह में न आएं।बताया जा रहा है कि हिंदी और अंग्रेजी दो भाषाओं में यह कॉलर ट्यून होगी। वहीं इसमें बजने वाला मैसेज 30 सेकेंड का होगा।

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर हुई थी याचिका
उल्लेखनीय है कि बिग बी की आवाज वाली कॉलर ट्यून हटाने को लेकर कुछ दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि कॉलर ट्यून में असली कोरोना वॉरियर की आवाज होनी चाहिए। ऐसे में अमिताभ बच्चन की आवाज को कोरोना कॉलर ट्यून से हटाया जाए।

Meet voice-over artist Jasleen Bhalla who has become the 'voice of the pandemic' | Offbeat News – India TV

जानें- कौन है जसलीन भल्ला
जसलीन भल्ला वही हैं, जो पिछले साल मार्च-अप्रैल में कोरोना वायरस के चलते लगाए गए लॉकडाउन के दौरान अचानक सुर्खियों में आ गई थीं। उस वक्त अचानक लोगों को डिफॉल्ट कॉलरट्यून के तौर पर जसलीन की आवाज में रिकॉर्ड संदेश ‘कोरोना वायरस या कोविड-19 से आज पूरा देश लड़ रहा है। मगर, याद रहे हमें बीमारी से लड़ना है, बीमार से नहीं। उनसे भेदभाव न करें...’ सुनाई देने लगा था।

जसलीन भल्ला जानी-मानी वॉइस ओवर आर्टिस्ट हैं। वह पहले भी कोरोना से जुड़ी कॉलर ट्यून को आवाज दे चुकी हैं। वह पिछले करीब एक दशक से वॉइस ओवर आर्टिस्ट के तौर पर काम कर रही हैं जिनकी आवाज हम दिल्ली मेट्रो, स्पाइस जेट और इंडिगो की फ्लाइट में भी सुनते आए हैं। वह स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट भी रह चुकी हैं।

कमेंट करें
sedLE
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।