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ऑनलाइन परीक्षा का विरोध करने पर एएमयू प्रोफेसर को चेतावनी

June 11th, 2020 12:00 IST
 ऑनलाइन परीक्षा का विरोध करने पर एएमयू प्रोफेसर को चेतावनी

हाईलाइट

  • ऑनलाइन परीक्षा का विरोध करने पर एएमयू प्रोफेसर को चेतावनी

अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश), 11 जून (आईएएनएस)। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एक प्रोफेसर आफताब आलम को चेतावनी दी गई है। आलम ने विश्वविद्यालय में ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षाओं पर अपना विरोध जताया है।

राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर को लिखे गए पत्र में, एएमयू के रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद ने कहा है कि आलम के ईमेल में छात्रों को अंतिम वर्ष की परीक्षा का बहिष्कार करने की क्षमता थी। जबकि कोविड -19 महामारी के कारण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है और ऐसे में यह विश्वविद्यालय की परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में समस्याओं का कारण बन सकता है।

रजिस्ट्रार ने यह भी कहा कि प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय प्रशासन को परोक्ष रूप से धमकी दी है कि अगर वे ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा में आगे बढ़ते हैं, तो कुछ छात्र आत्महत्या कर सकते हैं। उन्होंने एक युवा महिला छात्र के उदाहरण का हवाला दिया है जिसने इंटरनेट कनेक्टिविटी की कथित समस्याओं के कारण केरल में आत्महत्या कर ली।

रजिस्ट्रार ने आलम को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, अगर भविष्य में कोई ऐसी समस्या आती है, तो आपको इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

आलम कार्यकारी परिषद के सदस्य भी हैं। उन्होंने वीसी को अपने पत्र में कहा था कि ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा प्रक्रिया में छात्रों को इंटरनेट एक्सेस, कंप्यूटर / लैपटॉप या लेटेस्ट स्मार्टफोन, किताबें और अच्छी अध्ययन सामग्री की आवश्यकता होती है वे वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने आगे कहा, कई छात्र अपने घर चले गए हैं, हो सकता है उनके पास अध्ययन सामग्री भी न हो। कई ऐसे छात्र भी हैं, जो सिर्फ इसलिए अक्षम हैं क्योंकि उनके पास लेटेस्ट स्मार्टफोन और लैपटॉप नहीं हैं और ना ही फिक्स्ड 4 जी इंटरनेट कनेक्शन नहीं है। ऐसे में उन्हें परीक्षा की प्रक्रिया पूरी करने में बहुत मुश्किल होगी।

प्रोफेसर ने प्रशासन से आग्रह किया कि वे ऑनलाइन ओपन-बुक परीक्षा के अपने निर्णय को रद्द करें और विभिन्न विकल्पों की जांच के लिए विशेषज्ञों के एक कार्यकारी समूह की नियुक्ति करें क्योंकि ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षाएं एक संभव समाधान नहीं है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।