दैनिक भास्कर हिंदी: यूपी में विधवा पेंशन के नाम पर फर्जीवाड़ा, सरकार ने दिए जांच के आदेश

December 13th, 2017

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी की सरकार में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस खुलासे में सामने आया है कि यूपी में विधवा पेंशन के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया है। बताया जा रहा है कि विधवा पेंशन में एक लाख से अधिक लाभार्थियों के आधार नंबर ही फर्जी निकले हैं। इतना ही नहीं करीब 15 हजार पेंशनधारियों के बैंक खातों में बड़ी गड़बड़ सामने आई है। इस घोटाले का खुलासे होने के बाद प्रदेश की योगी सरकार ने इसकी जांच डीपीओ को सौंप दी है। 


डीपीओ करेंगे घोटाले की जांच

जानकारी के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि सरकार जो 500 रुपए विधवा पेंशन के तौर पर देती थी, उन्हीं खातों में कई अन्य पेंशन का भी लाभ भी दिया जा रहा है। ये जांच पेंशन के लिए जमा किए गए बिलों के आधार पर की गई है। जिसमें पता चला कि जो लाभार्थी सरकार से पेंशन के पैसे ले रहे थे, इनमें कई ऐसे भी थे जिनके आधार नंबर ही गलत थे, वहीं कई लोग तो जीवित भी नहीं रहे। इस घोटाले का खुलासा होने के बाद यूपी सरकार ने डीपीओ को जांच की कमान सौंप दी है।


संदिग्ध खाताधारकों को ब्लॉक किया गया

डीपीओ इस मामले में जिला स्तर पर हर लाभार्थी की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट देगा। जिसके बाद ही विधवा पेंशन रिलीज की जाएगी। बता दें कि तब तक के लिए सभी संदिग्ध खाताधारकों को ब्लॉक कर दिया गया है। इसकी सूची भी प्रशासन को भेज दी गई है। अब इस सूची का पूरी तरह से सत्यापन किए जाने के बाद ही पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा।


गौरतलब है कि इन सभी लाभार्थियों को महिला कल्याण विभाग हर महीने 500 रुपए देती है। इसके साथ एक साथ 3 महीने का भी भुगतान किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि ऐसा फर्जीवाड़ा ज्यादातर लाभार्थी नहीं बल्कि सरकारी मिलीभगत से अधिकारी ही कर रहे थे। सरकार की इस खुलासे के बाद कोशिश है कि सभी की पड़ताल कर जल्द से जल्द गिरफ्तारी की जाए। 


सॉफ्टवेयर की मदद से हुआ खुलासा

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार विधवाओं को पेंशन देने की स्कीम चलाती है। जिसके तहत 17.5 लाख महिलाओं को आर्थिक मदद दी जाती है। हाल ही में राज्य सरकार ने सभी पेंशनधारियों को आधार कार्ड से अपना खाता जोड़ने के संबंध में आदेश दिया था। जिसके बाद यह खुलासा हुआ है। इस प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए सॉफ्टवेयर से नजर भी रखी जा रही थी। इसी सॉफ्टवेयर से निगरानी किए जाने पर खुलासा हुआ कि इस योजना का लाभ लेने के लिए लाखों लोगों ने फर्जीवाड़ा कर रखा है।