दैनिक भास्कर हिंदी: प्रतिबंधित नहीं है गोंसाल्विस के पास मिली किताब - अदालत में वकील की दलील

August 29th, 2019

हाईलाइट

  • 'वार एंड पीस' किताब को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
  • भीमा कोरेगांव केस में आरोपी गोन्जाल्विस की जमानत पर हुई सुनवाई
  • कोर्ट ने गोन्जाल्विस से अपने घर में राज्य विरोध सामग्री रखने का मकसद पूछा

डिजिटल डेस्क, मुंबई। एलगार परिषद–भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार आरोपी वेरेन गोंसाल्विस के पास मिली सीडी व किताबों को लेकर गुरुवार को उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मिहीर देसाई ने बांबे हाईकोर्ट में सफाई दी। उन्होंने कहा कि मेरे मुवक्किल के पास कबीर कला मंच द्वारा जारी ‘राज्य दमन विरोधी’ सीडी व ‘वार एंड पीस इन जंगलीमहल’ शीर्षक वाली जो किताब मिली है उस पर सरकार ने प्रतिबंध नहीं लगाया है। और न ही इस किताब को जब्त किया है। यह किताब आनलाइन खरीद के लिए अमेजान व दूसरी ई-कामर्स वेबसाईट पर उपलब्ध है। श्री देसाई ने दावा किया कि सिर्फ यह किताब व सीडी मिलने के आधार पर मेरे मुवक्किल को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता है। और न ही उन्हें किसी प्रतिबंधित संगठन का सदस्य माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि मेरे मुवक्किल लेखक व स्तंभकार हैं। वे मानवाधिकार से जुड़े विशषों पर आलोचनात्मक लेख लिखते हैं। इसलिए उनके पास से उपरोक्त किताब मिली। अधिवक्ता देसाई ने कहा कि मेरे मुवक्किल की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत प्रदान की जाए। हाईकोर्ट में गोंसाल्विस की ओर से दायर जमानत आवेदन पर सुनवाई चल रही है।  इस बीच न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान महान लेखक टॉलस्टॉय की श्रेष्ठ कृति ‘वार एंड पीस’ का जिक्र नहीं किया था। 
 

 

हाईकोर्ट ने गोन्जाल्विस से पूछा, घर पर ‘वार एंड पीस’ किताब क्यों रखी थी ?

भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी वी.गोन्जाल्विस की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते वक्त बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'वार एंड पीस' को लेकर सवाल किया था। कोर्ट ने गोन्जाल्विस के घर टॉल्सटाय की किताब 'वार एंड पीस' और सीडी समेत कुछ सामग्री के मिलने पर अपत्ति जताई थी। जस्टिस सारंग कोतवाल की पीठ ने ने गोन्जाल्विस से अपने घर में राज्य विरोध सामग्री रखने का मकसद पूछा था। कोर्ट ने कहा, आपको अदालत को यह स्पष्ट करना होगा। 

बता दें कि ‘वार एण्ड पीस’ रूस के प्रसिद्ध लेखक लियो टॉल्सटाय द्वारा रचित उपन्यास है। सुनवाई के दौरान यह उपन्यास बहस का विषय बन गया। मामले की जांच कर रही पुणे पुलिस ने दावा किया कि यह एक साल पहले मुंबई में गोन्जाल्विस के घर पर छापे के दौरान जब्त ‘‘बेहद भड़काऊ साक्ष्यों’’ में से एक है। हाईकोर्ट ने गोन्जाल्विस के घर से जब्त जिन पुस्तकों और सीडी का जिक्र किया है। 

 

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