दैनिक भास्कर हिंदी: मेघालय के राज्यपाल की अपील, कश्मीरी उत्पादों को करें बायकॉट

February 19th, 2019

हाईलाइट

  • मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय ने ट्वीट कर सभी कश्मीरी उत्पादों को बायकॉट करने का आहवान किया है।
  • सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद उनका ये बयान सामने आया है।
  • हालांकि, उन्‍होंने यह भी साफ किया कि वे एक रिटायर्ड आर्मी कर्नल होने के नाते यह सुझाव दे रहे हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय ने मंगलवार को ट्वीट कर सभी कश्मीरी उत्पादों को बायकॉट करने का आहवान किया है। जम्मू- कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के बाद उनका ये बयान सामने आया है। हालांकि, उन्‍होंने यह भी साफ किया कि वे एक रिटायर्ड आर्मी कर्नल होने के नाते यह सुझाव दे रहे हैं।

तथागत रॉय ने ट्विटर पर लिखा, 'इंडियन आर्मी के रिटायर्ड कर्नल की अपील। कश्मीर का दौरा न करें, अगले 2 वर्षों के लिए अमरनाथ न जाएं। कश्मीरी या कश्मीरी ट्रेड्समैन के सामान न खरीदें, जो हर सर्दियों में आते हैं। हर तरह के कश्मीरी चीजों का बहिष्कार करें। मैं इससे सहमत हूं।'

तथागत रॉय ने रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य के ट्वीट को भी रिट्वीट करते हुए लिखा, 'पाकिस्तान की सेना (जो कश्मीरी अलगाववादियों को निर्देश देती है) 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में थी। वहां पाकिस्तानी सैनिकों ने हरतरफ़ बलात्कार और हत्याएं की। भारत ने मारा नहीं होता तो पूर्वी पाकिस्तान उसी के पास रह जाता। मैं यह सुझाव नहीं दे रहा हूं कि हम उतनी दूर जाएं, लेकिन कम से कम कुछ दूरी तो तय करें?'

 

 

मेजर गौरव आर्य ने ट्वीट किया था, 'भारतीय सेना अगर अपने हथियारों का सही से इस्तेमाल करे तो कश्मीर में होने वाले नुक़सान को कम किया जा सकता है। हालांकि राजनीतिक तौर पर हमें आश्वस्त किया गया है कि हम अपने लोगों के बीच काम कर रहे हैं और हमें संयमित रहना चाहिए।'

तथागत रॉय के ट्वीट का जवाब देते हुए जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा,  ये कट्टरपंथी विचार ही कश्मीर को रसातल में ले जा रहे हैं और तथागत अगर आप ऐसा चाह ही रहे हैं तो आप कश्मीर से निकलने वाली नदियों के पानी को क्यों नहीं रोक देते जिससे आप बिजली पैदा करते हैं?

 

 

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने भी तथागत के इस बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, ‘मेघालय के राज्यपाल का बहुत ही खेदजनक बयान आया है। भारत सरकार को उन्हें तुरंत बर्खास्त करना चाहिए। अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो इसका मतलब है कि इसे उनकी मौन स्वीकृति है और वे इसका इस्तेमाल माहौल को बांटने के लिए चुनावी रणनीतिक के तौर पर कर रहे हैं।

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