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CCI सबसे निचले स्तर पर, वित्तमंत्री ने इनकम टैक्स रेट में कटौती के संकेत दिए

CCI सबसे निचले स्तर पर, वित्तमंत्री ने इनकम टैक्स रेट में कटौती के संकेत दिए

हाईलाइट

  • दो महीने के भीतर कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस में 3.7 अंक की गिरावट
  • यह 2014 में PM मोदी के सत्ता में आने के बाद सबसे निचला स्तर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुस्‍ती के दौर से गुजर रही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को एक और झटका लगा है। दरअसल, देश का कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) 5 साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर महीने में CCI गिरकर 85.7 अंक पर पहुंच गया है। यह 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद सबसे निचला स्तर है। बता दें कि बीते सितंबर महीने में कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स 89.4 पर था। इस लिहाज से सिर्फ दो महीने में 3.7 अंक की गिरावट है।

देश में आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए सरकार लगातार कोशिशें कर रही है। इसी के तहत वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को इनकम टैक्स रेट में कटौती के संकेत दिए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इनकम टैक्स रेट को ज्यादा तर्कसंगत बनाने समेत अन्य उपायों पर विचार किया जा रहा है। 

जब उनसे पूछा गया कि क्या इनकम टैक्स रेट में राहत दी जाएगी? जवाब में उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स रेट को ज्यादा तर्कसंगत बनाने पर विचार किया जा रहा है। कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के बाद से इसकी मांग और तेज हो गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि इनकम टैक्स रेट में राहत विभिन्न उपायों में से एक है, जिसके बारे में सरकार विचार कर रही है। टैक्स में कटौती की मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लोगों की खरीदने की शक्ति बढ़ सके और मांग में तेजी आए।

टैक्स सिस्टम और आसान बनाया जाएगा- वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे सावधानी के साथ समझौता नहीं करें, लेकिन मांग में तेजी लाने की कोशिश की जाए। मांग में तेजी लाने के लिए दूर-दराज के इलाकों में पिछले दो महीने में करीब पांच लाख करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग का योगदान करीब 60 फीसदी है। वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि टैक्सपेयर्स को परेशान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा टैक्स सिस्टम और ज्यादा आसान बनाना है। वह विभिन्न प्रकार की छूटों को भी हटाना चाहती हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट टैक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अब यह टैक्स ज्यादा आसान और छूटों से मुक्त व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।

देश की इकोनॉमी को लेकर लोगों का भरोसा कम हुआ

कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स में गिरावट का मतलब ये है कि देश की इकोनॉमी को लेकर लोगों का भरोसा कम हुआ है और ग्राहक खरीदारी नहीं कर रहे हैं। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए यह चिंता की बात है। कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स जितना मजबूत होता है, अर्थव्यवस्था के लिए वह उतनी ही अनुकूल स्थिति मानी जाती है। इंडेक्‍स में मजबूती का मतलब ये होता है कि ग्राहक बाजार और अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी हैं। इस इंडेक्‍स में मजबूती तभी मिलती है, जब ग्राहक सर्विस और गुड्स की जमकर खरीदारी करते हैं। जाहिर सी बात है, इससे अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलती है। आरबीआई ने यह सर्वे रिपोर्ट देश के 13 बड़े शहरों में कुल 5,334 घरों से जुटाए गए आंकड़े के आधार पर तैयार की है। ये 13 शहर- अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्‍नई, दिल्‍ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, पटना और त्रिवेंद्रपुरम हैं।

6 साल के निचले स्‍तर पर GDP
बता दें कि चालू वित्त वर्ष (2019-20) की दूसरी तिमाही में भारत की विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ 6 साल के निचले स्‍तर पर आ गई है। अब जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा 4.5 फीसदी पहुंच गया है। चालू वित्त वर्ष (2019-20) की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ की दर 5 फीसदी पर थी। इस लिहाज से सिर्फ 3 महीने के भीतर जीडीपी की दर में 0.5% की गिरावट आई है। वहीं लगातार छठी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही में ग्रोथ रेट 8%, दूसरी तिमाही में 7 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.8% पर थी। इसके अलावा वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में जीडीपी गिरकर 5 फीसदी पर आ गई।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।