दैनिक भास्कर हिंदी: चंद्रयान-2: चंद्रमा से चंद कदम दूर, दक्षिणी ध्रुव पर 7 सितंबर को होगी लैंडिंग

September 4th, 2019

हाईलाइट

  • चंद्रमा की सतह से 34 किलोमीटर दूर चंद्रयान
  • 7 सिंतबर को दक्षिणी ध्रुव पर करेगा लैंडिंग
  • 101 किमी के पेरीजी वाली ऑर्बिट में घूम रहा है चंद्रयान-2

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। चंद्रयान-2 ऐतिहासिक कदम उठाने से महज 35 किलोमीटर दूर है। मंगलवार 3.42 बजे लैंडर विक्रम चांद को चांद की सबसे नजदीकी कक्षा में डाल दिया गया है। यह प्रक्रिया चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से अलग होने के एक दिन बाद भी पूरी कर ली गई। आज (बुधवार) तड़के तीन बजकर 30 मिनट से लेकर चार बजकर 30 मिनट के बीच इसकी कक्षा में कमी की जाएगी। अब से करीब 45 घंटे बाद विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। अब विक्रम लैंडर चांद के चारों तरफ 35 किमी की एपोजी और 101 किमी की पेरीजी वाली ऑर्बिट में घूम रहा है।  

ऐसे समझे 7 सितंबर का गणित 
अभी ऑर्बिटर चांद के चारों तरफ 96 किमी की एपोजी और 125 किमी की पेरीजी वाली अंडाकार कक्षा में चक्कर लगा रहा है। जिसकी गति करीब 2 किमी प्रति सेकंड हैं। चंद्रयान-2 तीन हिस्सों से मिलकर बना है - पहला- ऑर्बिटर, दूसरा- विक्रम लैंडर और तीसरा- प्रज्ञान रोवर. विक्रम लैंडर के अंदर ही प्रज्ञान रोवर है, जो सॉफ्ट लैंडिंग के बाद बाहर निकलेगा।

6 से 7 सितंबर की दरम्यानी रात को 1:30 से 1.40 बजे रात को विक्रम लैंडर 35 किमी की ऊंचाई से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना शुरू करेगा। तब इसकी गति होगी 200 मीटर प्रति सेकंड। रात 1:55 बजे विक्रम लैंडर दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद दो क्रेटर मैंजिनस-सी और सिंपेलियस-एन के बीच मौजूद मैदान में उतरेगा। करीब 6 किमी की ऊंचाई से लैंडर 2 मीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह पर उतरेगा। ये 15 मिनट बेहद तनावपूर्ण होंगे।

रात 3.55 बजे लैंडिंग के करीब 2 घंटे के बाद विक्रम लैंडर का रैंप खुलेगा। इसी के जरिए 6 पहियों वाला प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर उतरेगा। सुबह 5.05 बजे प्रज्ञान रोवर का सोलर पैनल खुलेगा।इसी सोलर पैनल के जरिए वह ऊर्जा हासिल करेगा। सुबह 5.10 बजे प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर चलना शुरू करेगा। वह एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह पर 14 दिनों तक यात्रा करेगा। इस दौरान वह 500 मीटर की दूरी तय करेगा।