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राज्यसभा में बुधवार को पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, भाजपा ने जारी किया व्हिप

राज्यसभा में बुधवार को पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, भाजपा ने जारी किया व्हिप

हाईलाइट

  • लोकसभा में पास हुआ नागरिकता संशोधन बिल
  • बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े
  • बुधवार को राज्यसभा में पेश होगा बिल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन बिल 2019 पास हो गया है। अब बुधवार को राज्यसभा में बिल पेश किया जाएगा। बिल पेश होने के बाद राज्यसभा में इसपर चर्चा होगी। भाजपा ने 10 और 11 दिसंबर को अपने राज्यसभा संसादों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। केंद्र सरकार अब राज्यसभा में भी इस बिल को जल्द पास करवाना चाहती है। राज्यसभा में बिल पास होते ही इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून बनेगा।

सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा और मतविभाजन के बाद पास हो गया। देर रात चली चर्चा के बाद बिल के पक्ष में 311 वोट, जबकि विरोध में 80 वोट पड़े। जेडीयू और शिवसेना ने इस बिल के पक्ष में वोट किया। बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर अमित शाह की तारीफ की।

गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया। चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि कई सदस्यों ने धारा-14 का हवाला देते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया। मैं कहना चाहता हूं कि किसी भी तरह से ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है।  इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो बिल लाने की जरूरत ही नहीं होती। जिस हिस्से में ज्यादा मुस्लिम रहते थे वो पाकिस्तान बना और दूसरा हिस्सा भारत बना। नेहरू-लियाकत समझौते में भारत और पाकिस्तान ने अपने अल्पसंख्यकों का ध्यान रखने का करार किया लेकिन पाकिस्तान ने इस करार का पूरा पालन नहीं किया।

शाह ने कहा, '3 देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में इस्लाम को राज्य धर्म बताया है। वहां अल्पसंख्यकों को न्याय मिलने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23% थी। 2011 में ये 3.7% पर आ गई। बांग्लादेश में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 22% थी जो 2011 में 7.8% हो गई। आखिर कहां गए ये लोग। जो लोग विरोध करते हैं उन्हें में पूछना चाहता हूं कि अल्पसंख्यकों का क्या दोष है कि वो इस तरह क्षीण किए गये? शाह ने कहा, 1951 में भारत में मुस्लिम 9.8 प्रतिशत थे। आज 14.23 प्रतिशत हैं, हमने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। आगे भी किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।'

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