दैनिक भास्कर हिंदी: किस परंपरा से संन्यासी हैं साध्वी प्रज्ञा, कांग्रेस पर्यवेक्षक रावत ने उठाया सवाल

May 10th, 2019

हाईलाइट

  • 12 मई को होना है भोपाल सीट पर चुनाव
  • कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं दिग्विजय सिंह
  • भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा को उतारा है मैदान में

डिजिटल डेस्क, भोपाल। देश की सबसे चर्चित लोकसभा सीट भोपाल में 12 मई को चुनाव होने वाले हैं। यहां भाजपा ने मालेगांव ब्लास्ट के बाद चर्चा में आईं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भरोसा जताया है। अपनी स्थिति साफ करने के लिए कांग्रेस ने कई मीडियो संस्थानों में काम करने के बाद उत्तराखंड से विधायक चुने गए मनोज रावत को पर्यवेक्षक बनाकर भोपाल भेजा था, पंद्रह दिन भोपाल में रहकर उन्होंने गुप्त रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस को भेजी है। रावत ने भास्कर हिंदी को बताया कि भोपाल में कांग्रेस किन मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है।

अपने गुरु का नाम बताएं साध्वी प्रज्ञा
रावत ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा यदि समाजिक जीवन में आना चाहती हैं तो उन्हें कुछ बातें स्पष्ट करना चाहिए, उन्हें बताना चाहिए की वो आखिर किस परंपरा के तहत संन्यासी बनी हैं, क्योंकि संन्यास लेने की एक प्रक्रिया होती है। कांग्रेस पर्यवेक्षक रावत ने कहा कि साध्वी को अपने गुरु का नाम भी सभी को बताना चाहिए, जिससे किसी के भी मन में उनके संन्यासी होने पर संदेह न रह जाए।

BJP ने संन्यासियों का मजाक बनाया
कांग्रेस पर्यवेक्षक ने कहा कि हिंदू धर्म को सबसे ज्यादा खतरा, भाजपा के हिंदुत्व के प्रयोग से है। सनातन धर्म में एक परंपरा थी जो आदि गुरु शंकराचार्य जी ने शुरू की थी, सिर्फ 4 शंकराचार्य होते थे, जो 4 वेद, 27 उपनिषद के ज्ञाता होते थे। भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए न केवल फर्जी शंकराचार्य खड़े कर दिए, बल्कि संन्यासियों का भाी मजाक बना दिया।

परिवार का श्राद्ध करने के बाद बनते हैं संन्यासी
रावत ने कहा कि संन्यास और अखाड़े की सुस्थापित परंपरा थी। संन्यासी बनने से पहले याचक का परीक्षण किया जाता था, जब वे संतुष्ट हो जाते थे कि यह वैराग्य और संन्यास के लायक है, तभी उसे कई कर्मकांडों के बाद चोटी काटकर संन्यास आश्रम में प्रवेश कराया जाता था और दीक्षा दी जाती थी। खुद का श्राद्व करके, अपने परिवार, जाति और समाज के जितने भी सूचक हैं उनको नाते रिश्तों लोभ, मोह, माया को भी त्यागना पड़ता है। सांसरिक और पारिवारिक बंधनों को छोड़कर ही गुरू द्वारा दिए गए नए नाम को प्रयोग करना होता था, उसके लिए पिता के स्थान पर गुरू का नाम आता और अखाड़ा ही उसका परिवार होता। संन्यासी परिवार से संबंध नहीं रख सकता है, भाजपा ने मायावी और लोभी लोगों को भगवा पहनाकर जनता के सामने ला दिया है। ये लोग धर्म को हानि पहुंचा रहे हैं।

दिग्विजय ने नहीं किया हिंदू आतंकवाद शब्द का प्रयोग
पूर्व मुख्यमंत्री की तरफदारी करते हुए रावत ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने नर्मदाजी की पैदल परिक्रमा की है। ग्रहस्थ आश्रम में भी रहकर हिंदू धर्म में कठोर यात्राओं का पालन बहुत कम संन्यासी करते हैं, जिसे दिग्विजय ने पूरा किया है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय ने कभी भी हिंदू आतंकवाद का शब्द का प्रयोग नहीं किया, बल्कि इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले उस समय केंद्रीय गृह सचिव रहे आरके सिंह ने किया, जो वर्तमान में भाजपा सांसद और मोदी सरकार में मंत्री भी हैं।

शिवराज सरकार को प्रज्ञा ने कहा था नपुंसक
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रज्ञा सिंह और भजपा उन पर उत्पीड़न का आरोप लगा रहे हैं, जो कि मिथ्या है क्योंकि दिग्विजय सिंह 15 साल से किसी भी सरकारी पद पर नहीं थे। सुनील जोशी हत्याकांड में प्रज्ञा की जब गिरफ्तारी हुई तब शिवराज सिंह की सरकार थी, प्रज्ञा ने शिवराज सरकार को उस वक्त नपुंसक कहा था, आज वे प्रज्ञा के साथ घूम रहे हैं। मुंबई में जब 26-11 का आतंकी हमला हुआ तब मुंबई पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह थे, वे भाजपा के सांसद हैं। हिंदू आतंकवाद कहने वाले आरके सिंह मोदी सरकार में मंत्री हैं और शिवराज सिंह और मोदी इनके साथ मंच शेयर कर रहे हैं।

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