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हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आज, सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती

October 24th, 2019 01:12 IST
हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आज, सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती

हाईलाइट

  • हरियाणा और महाराष्ट्र में गुरुवार को विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती की जाएगी
  • 17 राज्यों की 51 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव के भी परिणाम घोषित किए जाएंगे
  • वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होगी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हरियाणा और महाराष्ट्र में गुरुवार को विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती की जाएगी। दोनों राज्यों के साथ 17 राज्यों की 51 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव के लिए भी परिणाम घोषित किए जाएंगे। सतारा और समस्तीपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव के परिणाम भी गुरुवार को घोषित किए जाएंगे। इन सीटों पर 21 अक्टूबर को मतदान हुआ था। वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होगी।

महाराष्ट्र में 145 सीटों पर बहुमत
महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 145 सीटों का है। मतदान के बाद आए एग्जिट पोल नतीजों में तमाम न्यूज चैनल और चुनाव सर्वे एजेंसियों ने भाजपा को प्रचंड बहुमत का अनुमान जताया है। बीजेपी का दावा है कि उसे अकेले 144 सीटें मिल सकती हैं। जबकि बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को 212 सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है। महाराष्ट्र में राकांपा के लिए विधानसभा चुनाव परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, जो कांग्रेस का सहयोगी दल है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, एआईएमआईएम और वनीत बहुजन अगाड़ी जैसी पार्टियां भी चुनाव मैदान में हैं।

हरियाणा में बहुमत के लिए 46 सीटों की जरुरत
राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी को अपनी सत्ता बरकरार रहने की उम्मीद है और एग्जिट पोल से उसकी इन उम्मीदों को और बल मिला है जिनमें बीजेपी की आसान जीत का अनुमान जताया गया है। एबीपी-सी वोटर के एग्जिट पोल में बीजेपी को 72, कांग्रेस को 8 जबकि अन्य को 10 सीटें दी गई है। टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल में बीजेपी को 71, कांग्रेस को 11 और अन्य को 8 सीटें दी गई है। टीवी 9 भारतवर्ष के एग्जिट पोल में बीजेपी को 47, कांग्रेस को 23 और अन्य को 20 सीटें दी गई है। न्यूज 18- आईपीएसओएस के एग्जिट पोल में बीजेपी को 75, कांग्रेस को 10 और अन्य को 5 सीटें दी गई है। हालांकि आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल ने भाजपा को कुल 90 में से 32-44 सीटें दी हैं, वहीं कांग्रेस को 30 से 42 सीटें मिलने का अनुमान है।

बीजेपी जीती को रचेगी इतिहास
2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक 47 सीटें मिलीं थीं, वहीं कांग्रेस को 15 सीटों से संतोष करना पड़ा था, जबकि इनेलो को 19, हरियाणा जनहित कांग्रेस को दो, निर्दलीय एवं अन्य को सात सीटें मिलीं थीं। राज्य में तब मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में भाजपा ने बहुमत से सरकार बनाई थी। जबकि 2014 में महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। तब भाजपा को 28.1 फीसदी वोट के साथ 122, शिवसेना को 19.5 फीसदी वोट के साथ 63 सीटें मिली थीं। दोनों का वोट शेयर जोड़ दें तो यह 47.6 फीसदी और सीटों की संख्या 185 पहुंचती है। अगर भाजपा फिर से हरियाणा जीतती है और महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सत्ता में वापसी करती है तो भाजपा इतिहास रचेगी।

इन सीटों पर हुए थे उपचुनाव
यूपी की 11 (गंगोह, रामपुर, इगलास, लखनऊ कैण्ट, गोविन्दनगर, मानिकपुर, प्रतापगढ, जैदपुर, जलालपुर, बलहा और घोसी सीट), गुजरात की छह (अमराईवाड़ी, खेरालू, थराद, लुणावाडा, बयाड और राधनपुर), बिहार की पांच (किशनगंज, सिमरी बख्तियारपुर, दरौंदा, नाथनगर और बेलहर), असम की चार ( रंगपारा, सोनारी, रतबारी और जनिया ), हिमाचल प्रदेश की दो (धर्मशाला और पच्छाद), तमिलनाडु की दो (विक्रवंदी और नानगुनेरी), पंजाब की चार (फगवाड़ा, जलालाबाद, मुकेरियां और दाखा) पर उपचुनाव हुए थे।

इसके अलावा केरल की पांच (तिरुवनंतपुरम, अरूर, कोन्नी, एर्नाकुलम और मंजेश्वरम), सिक्किम की तीन (पोकलोक कामरंग, गंगटोक और मरताम-रुमटेक), राजस्थान की दो (झुंझुनूं की मंडावा और नागौर की खींवसर), अरूणाचल प्रदेश की खोंसा पश्चिम, मध्य प्रदेश की झाबुआ, ओडिशा में बारगढ़ जिले की बीजेपुर, छत्तीसगढ़ की चित्रकूट, पुडुचेरी की कामराजनगर, मेघालय की शेल्ला और तेलंगाना की हुजूरनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।