दैनिक भास्कर हिंदी: crime: आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को दी जाएगी फांसी, 13 साल पहले प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों को उतारा था मौत के घाट

February 24th, 2021

हाईलाइट

  • दवा देकर बेहोश किया, फिर कुल्हाड़ी से काट दिया
  • साजिश ऐसी कि पुलिस को भी दे दिया चकमा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी दी जाएगी। दोषी महिला को उत्तर प्रदेश की मथुरा की महिला जेल में बने फांसी घर में लटकाया जाएगा। मामले में महिला के प्रेमी को भी फांसी दी जाएगी। इसके लिए मथुरा जेल में तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी। शबनम अभी रामपुर जेल में बंद है। जबकि, उसका प्रेमी आगरा जेल में है।

दोषियों को फांसी दी जाने की तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है। लेकिन, कोर्ट ने फांसी घर की मरम्मत और फंदे के रस्सी का ऑर्डर दिया गया है। निर्भया के दोषियों को फंदे से लटकाने वाले और मेरठ में रहने वाले पवन जल्लाद अब तक दो बार फांसी घर का निरीक्षण भी कर चुके हैं। पवन ने कहा कि मथुरा जेल के अफसरों ने संपर्क किया है। जैसे ही बुलावा आएगा, पहुंच जाऊंगा।

बक्सर से मंगाई जा रही रस्सी
मथुरा जिला कारागार में जल्लाद पवन को तख्ता लीवर में कुछ कमी दिखी, जिसे प्रशासन ठीक करवा रहा है। शबनम को फांसी पर लटकाने के लिए बिहार के बक्सर से रस्सी मंगवाई जा रही है ताकि किसी तरह अड़चन पैदा न हो। 

पवन जल्लाद ने कहा- टूटा था तख्ता, लीवर भी जाम था
पवन जल्लाद ने बताया कि वह 6 माह पहले मथुरा जेल गया था। वह काफी खराब हालत में था। जिस तख्ते पर खड़ाकर दोषी को फांसी को दी जाती है, वह टूट चुका था। अब उसे बदलवा दिया गया है। लीवर भी जाम हो चुका था। वह भी ठीक हो चुका है। मेरठ के जेल अधीक्षक डॉक्टर बीबी पांडेय बताया कि मथुरा जेल से जैसे ही पवन जल्लाद को बुलावा आएगा, उसे भेज देंगे।

13 साल पहले प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की हत्या की थी
दरअसल, 13 साल पहले अमरोहा की रहने वाली शबनम ने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। सर्वोच्च न्यायालय से पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद अब हत्या के आरोप में बंद शबनम की फांसी की सजा को 15 फरवरी को राष्ट्रपति ने भी बरकरार रखा है, ऐसे में अब उसका फांसी पर लटकना तय हो गया है। 

शबनम के सलीम के साथ प्रेम संबंध थे
अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के गांव बावनखेड़ी के शिक्षक शौकत अली की इकलौती बेटी शबनम के सलीम के साथ प्रेम संबंध थे। सूफी परिवार की शबनम ने अंग्रेजी और भूगोल में एमए किया था। उसके परिवार के पास काफी जमीन थी। वहीं सलीम पांचवीं फेल था और पेशे से एक मजदूर था। इसलिए दोनों के संबंधों को लेकर परिजन विरोध कर रहे थे।

दवा देकर बेहोश किया और फिर कुल्हाड़ी से काट दिया
अमरोहा के बाबनखेड़ी गांव की निवासी शबनम ने 14 अप्रैल 2008 की रात अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता शौकत अली, मां हाशमी, भाई अनीस अहमद, उसकी पत्नी अंजुम, भतीजी राबिया और भाई राशिद के अलावा अनीस के 10 महीने के बेटे अर्श की हत्या कर दी थी। सभी को पहले दवा देकर बेहोश किया गया और इसके बाद अर्श को छोड़कर अन्य को कुल्हाड़ी से काट डाला था। शबनम ने अर्श का गला दबाकर उसे मारा था।

साजिश ऐसी कि पुलिस को भी दे दिया चकमा
शबनम ने हत्या करने के बाद तेजी से रोना-चीखना शुरू कर दिया। जब आसपास के लोग पहुंचे, तो हालात देखकर दंग रह गए। खून से लथपथ सात लाशें पड़ीं थीं। घर में अकेली 25 साल की लड़की शबनम जीवित बची थी। आधी रात को हुए इस सनसनी खेज हत्याकांड से पुलिस प्रशासन में हड़कंप में मच गया। शबनम ने पुलिस को बताया कि उसके घर में लुटेरे घुसे और पूरे परिवार की हत्या कर दी। वह बाथरूम थी, इसलिए बच गई।

शबनम और सलीम पर ऐसे कसा शिकंजा 
पुलिस ने लूट के एंगल से जांच की, लेकिन कोई सबूत हाथ नहीं लगा। इस बीच पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों को मारने से पहले कोई दवा खिलाकर बेहोश किया गया था।

गर्भवती होने के कारण पुलिस को शबनम पर शक हुआ
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस के शक की सुई शबनम पर घूम गई। शबनम की कॉल डिटेल निकाली गई, जिससे पता चला कि हत्या की रात शबनम की एक ही नंबर पर कई बार बात हुई। बाद में पुलिस को शबनम के गर्भवती होने का पता चला। शबनम शादी-शुदा नहीं थी, इसलिए पुलिस ने शबनम से कड़ी पूछताछ शुरू की। आखिरकार शबनम टूट गई और उसने अपने गुनाह कबूल किया।

सलीम की निशानदेही पर बरामद की कुल्हाड़ी
इसके बाद, पुलिस ने सलीम को भी दबोच लिया और बाद में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। सलीम की निशानदेही पर कत्ल में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी पुलिस ने बरामद कर ली।

15 जुलाई 2010 को ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी पाया, फांसी की सजा सुनाई 
अमरोहा जनपद के अंदर आने वाला बाबनखेड़ी गांव 2008 में मुरादाबाद जनपद में आता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अमरोहा जिला घोषित किया था। उसके बाद बाबनखेड़ी अमरोहा में चला गया और बाबनखेड़ी हत्याकांड की सुनवाई अमरोहा जिले की ट्रायल कोर्ट में सुनवाई होने लगी। 15 जुलाई 2010 को ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी बरकरार रखी। शबनम ने बेटे का हवाला देते हुए माफी की मांग की थी। 2015 सितंबर में UP के गवर्नर राम नाईक ने भी शबनम की दया याचिका याचिका खारिज कर दी थी।

जेल में ही शबनम ने बेटे को दिया था जन्म
जेल में रहने के दौरान शबनम ने 14 दिसंबर 2008 को बेटे को जन्म दिया था। उसका बेटा जेल में उसके साथ ही रहा था। 15 जुलाई 2015 में उसका बेटा जेल से बाहर आया, इसके बाद शबनम ने बेटे को उस्मान सैफी और उसकी पत्नी सौंप दिया था। उस्मान शबनम का कॉलेज फ्रेंड है, जो बुलंदशहर में पत्रकार है। शबनम ने उस्मान को बेटा सौंपने से पहले दो शर्तें रखी थी। उसके बेटे को कभी भी उसके गांव में न ले जाया जाए, क्योंकि वहां उसकी जान को खतरा है और दूसरी शर्त ये थी कि बेटे का नाम बदल दिया जाए।

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