दैनिक भास्कर हिंदी: पुलिस में सक्रियता की कमी से बढ़ रहा दिल्ली में अपराध : पूर्व पुलिस प्रमुख

July 31st, 2019

हाईलाइट

  • राष्ट्रीय राजधानी में अपराधों, खासकर बंदूकों के इस्तेमाल वाले जघन्य अपराधों में वृद्धि पुलिस विभाग में सक्रियता की कमी और बड़े अपराधियों की तलाश में ढिलाई के कारण हुई है
  • दिल्ली के दो पूर्व पुलिस आयुक्तों ने यह बात कही

नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में अपराधों, खासकर बंदूकों के इस्तेमाल वाले जघन्य अपराधों में वृद्धि पुलिस विभाग में सक्रियता की कमी और बड़े अपराधियों की तलाश में ढिलाई के कारण हुई है। दिल्ली के दो पूर्व पुलिस आयुक्तों ने यह बात कही।

अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए चर्चित रहे अजय राज शर्मा और नीरज कुमार ने पुलिस उपायुक्तों (डीसीपी) और सहायक पुलिस आयुक्तों (एसीपी) अधिकारियों द्वारा कानून व्यवस्था पर बारीकी से नजर रखने और अपने क्षेत्र के अपराधियों पर दवाब कायम रखने की जरूरत पर जोर दिया।

शहर की मौजूदा स्थिति पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर शर्मा ने आईएएनएस से कहा, मुझे लगता है कि दिल्ली में अपराधों के पीछे मुख्य कारण पुलिस में मूल भावना की कमी है।

उन्होंने कहा कि वह इससे असहमत हैं कि दिल्ली में बढ़ते अपराधों के पीछे मुख्य कारण पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की एनकाउंटर नीति के कारण पेशेवर अपराधियों का यहां शरण लेना है।

उन्होंने जोर देकर कहा, मैं इससे सहमत नहीं हूं कि उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के डर से पड़ोसी राज्य के अपराधियों ने दिल्ली में शरण ले ली है और वे ही यहां जघन्य अपराध कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश कैडर के 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी शर्मा साल 1999 से 2002 तक दिल्ली पुलिस के प्रमुख रहे। वाजपेयी सरकार ने उन्हें ऐसे समय में दिल्ली बुला लिया था, जब राष्ट्रीय राजधानी में चलती बसों तक में अपराध हो जाते थे।

उन्होंने कहा, वरिष्ठ अधिकारियों को यह जानने के लिए अपने कार्यालयों से बाहर निकलना होगा कि कई अपराधियों को अदालत से जमानत कैसे मिल जाती है। उन्हें जमानत कौन दिलवा रहा है? (अपराधियों को) जमानत मिलने से रोकने के लिए पुलिस स्टेशन अधिकारी (एसएचओ) ने क्या प्रयास किए? हमें ऐसे अपराधियों पर 24 घंटे नजर रखने की जरूरत है। पुलिस को उन पर लगातार दवाब बनाए रखना है।

दिल्ली में 2012 से 2013 तक पुलिस आयुक्त रहे 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी नीरज कुमार शर्मा की बात से सहमत हैं।

कुमार डी-कंपनी समेत अन्य संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर बड़े अपराधियों को आसानी से जमानत मिल रही है तो यह जाहिर है कि पुलिस अधिकारी अदालत नहीं जा रहे हैं और ना ही महत्वपूर्ण सुनवाइयों में शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, कितने मामलों में जांच अधिकारियों को अपराधियों की जमानत का विरोध करते देखा गया? बेहतर परिणाम के लिए पुलिस, विशेषकर एसीपी और डीसीपी को पर्यवेक्षक की भूमिका में सक्रिय होना होगा।

--आईएएनएस