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शरजील 5 दिन की पुलिस रिमांड पर, भड़काऊ भाषण देने पर देशद्रोह का है आरोप

January 30th, 2020 08:14 IST

हाईलाइट

  • दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के पास पांच दिन की हिरासत में
  • भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 124 ए, 153 ए और 505 के तहत मामला दर्ज
  • जहानाबाद से हुआ था गिरफ्तार

नई दिल्ली, एएनआई। दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को जेएनयू छात्र शारजील इमाम को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के पास पांच दिन की हिरासत में भेज दिया। आज दिन में इमाम को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया था। हालांकि बिहार से शरजील को दबोच कर लाने वाली दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी ज्यादा दिन का पुलिस रिमांड चाहती थी। बुधवार को दोपहर के वक्त शरजील जैसे ही दिल्ली पहुंचा, उसका यहां मेडिकल चैकअप कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद शाम करीब छह बजे आरोपी को सीएमएम के सामने पेश किया गया। सीएमएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शरजील इमाम को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

अपने भड़काऊ भाषणों की वजह से देशद्रोह के आरोप में फंसे जेएनयू छात्र ने असम को भारत से काटकर अलग करने का बयान दिया था, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। शरजील पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 124 ए, 153 ए और 505 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उल्लेखनीय है कि शरजील के भड़काऊ भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह यह कहते हुए सुना गया है, 'यदि हम सभी एक साथ आते हैं, तो हम पूर्वोत्तर को भारत से अलग कर सकते हैं। यदि हम इसे स्थायी रूप से नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम एक से दो महीने के लिए कर सकते हैं।' उसने कहा था, 'भारत से असम को काटना हमारी ज़िम्मेदारी है। जब ऐसा होगा, तभी सरकार हमारी बात सुनेगी।' 

मंगलवार को जहानाबाद पुलिस ने शारजील के छोटे भाई मुज़म्मिल इमाम को भी मंगलवार तड़के हिरासत में लिया था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रविवार को शारजील को उसके विवादास्पद भाषण के लिए देशद्रोह का मुकदमा दायर किया था।

बीते साल 13 और फिर 15 दिसंबर को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिले के जामिया विश्वविद्यालय, जामिया-जाकिर नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में हुई हिंसा के बारे में भी क्या शरजील इमाम की भूमिका संदिग्ध थी? पूछे जाने पर डीसीपी राजेश देव ने आईएएनएस से कहा, हां, बिलकुल पूछताछ होगी। प्राथमिकता पर मगर इसके विवादित वीडियो टेप रहेंगे। उसके बाद फिलहाल इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि उन दंगों (जामिया विवि, जाकिर नगर) में भी इसका हाथ निकल आए।

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