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दिल्ली: प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह- एयर क्लीनिंग डिवाइस लगाने पर करे विचार


हाईलाइट

  • बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर
  • ऑड-इवन सिस्टम पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • कोर्ट ने कहा- एयर क्लीनिंग डिवाइस लगाने पर विचार करें

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा का कहर जारी है। प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। प्रदूषण के कारण स्कूल बंद हैं। प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने चार नवंबर से ऑड-इवन सिस्टम लागू किया था। आज (शुक्रवार) सुप्रीम कोर्ट में उसी को लेकर सुनवाई हुई। 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए दिल्ली में एयर क्लीनिंग डिवाइस लगाने पर विचार करें। कोर्ट ने कहा कि इस समय दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 600 को पार कर गया है। वायु प्रदूषण से हर कोई प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने माना कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ऑड-इवन समाधान नहीं हो सकता।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोर्ट में कहा कि प्रदूषण स्तर में 3 प्रतिशत का योगदान कार का रहा है। बाकी वाहनों का इसमें 28 प्रतिशत का योगदान है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऑड-इवन एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता है। खासकर जब केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड का कहना है कि कार प्रदूषण का स्तर तीन प्रतिशत है। कचरा डंपिंग, निर्माण अपशिष्ट और सड़की की धूल भी प्रदूषण के स्तर में प्रमुख योगदानकर्ता हैं। 

दिल्ली में गुरुवार को भी प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहा। राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 470 रहा और गंभीर प्लस श्रेणी में बना रहा। पीएम10 की गणना 496 रही और यह गंभीर प्लस श्रेणी में रहा और पीएम 2.5 गणना 324 रही।

दिल्ली का एक्यूआई करीब बुधवार के स्तर पर बना रहा, जिसकी समग्र तौर पर गणना 476 की गई और आने वाले दो दिनों में ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है।समग्र रूप से एक्यूआई गंभीर श्रेणी में है, पीएम10 की गणना 489 है, जबकि पीएम2.5 की 326 है, जो गंभीर श्रेणी में है। सफर इंडिया के पूर्वानुमान के अनुसार, इस स्थिति में अगले दो दिनों तक कोई रिकवरी नहीं होने की उम्मीद है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।