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Indian Railway: 3840 ट्रेनों में सिर्फ 71 ट्रेनें हुई डायवर्ट, सिर्फ 4 ट्रेनों को लगा 72 घंटे से अधिक का समय

Indian Railway: 3840 ट्रेनों में सिर्फ 71 ट्रेनें हुई डायवर्ट, सिर्फ 4 ट्रेनों को लगा 72 घंटे से अधिक का समय

हाईलाइट

  • 90 फीसदी यानी 3500 ट्रेन समय पर चलायी गईं
  • अधिकतर ट्रेनें दोपहर 2 से 12 बजे के बीच चलाई गईं
  • ट्रेनों में भूख से मजदूरों की मौत होने की बात को नकारा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रेल ने साफ किया है कि कोई भी ट्रेन अपने मार्ग से नही भटकी है। रेलवे बोर्ड के चेयरमेन विनोद कुमार यादव ने इस बात का खंडन किया है कि ट्रेनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 9 दिनों तक समय लगा है। नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि शुक्रवार तक 3840 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाया गया है। इनमे सिर्फ 71 ट्रेनों का रूट ही बदला गया। इनमें से सिर्फ 4 ट्रेनों को ही 72 घन्टे से ज्यादा का समय लगा। जो 4 ट्रेनें ज्यादा लेट हुईं, वो उत्तरपूर्व में भूस्खलन की वजह से हुई।

90 फीसदी यानी 3500 ट्रेन समय पर चलायी गईं
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने साफ किया कि 19 मई से पहले किसी भी ट्रेन के रूट में बदलाव नहीं किया गया, जबकि 20 से 24 मई के बीच 1279 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गयीं। उन्होंने साफ किया कि 3840 ट्रेनों में से 90 फीसदी यानी 3500 ट्रेन समय पर चलायी गईं। शुक्रवार तक ट्रेनों का व्यौरा देते हुए सीआरबी ने कहा कि अब तक 3840 ट्रेनों के जरिये कुल 52 हजार 40 हजार यात्री अपने गंतव्य स्थान को पहुंच चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 15 मई से 24 मई के बीच 20 लाख यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाया गया। इसके हिसाब से प्रतिदिन 3 लाख यात्रियों को घर पहुंचाया गया। इन ट्रेनों में से 80 फीसदी ,बिहार और उत्तरप्रदेश के लिए चलाई गई।

अधिकतर ट्रेनें दोपहर 2 से 12 बजे के बीच चलाई गईं
उन्होंने कहा कि अब राज्यों की तरफ से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की मांग कम आ रही है, आज 279 ट्रेनों की मांग आई थी, जबकि 28 मई को 137 और 27 मई को 172 ट्रेनों की मांग आई थी। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकतर ट्रेनों को दोपहर 2 बजे से 12 बजे के बीच चलाया गया, जिसकी वजह से ट्रैक पर ट्रैफिक ज्यादा रही। 

ट्रेन में भूख से मजदूरों की मौत को नकारा                 
उन्होंने साफ किया कि ट्रेनों में भूख से हुईं मौत की खबर गलत है, जो भी मौत हुई है उसकी जांच की जा रही है, लेकिन उन्होंने बताया कि ट्रेनों में पर्याप्त खाना और पानी दिया जा रहा है। ट्रेनों में अब तक 30 से ज्यादा डिलीवरी हुई है, इन महिलाओं को निकटस्थ रेलवे स्टेशन पर चिकित्सा सुविधा पहुचाई गयी हैं। उन्होंने लोगो से अपील की जो महिलाएं गर्भवती हैं, या जो लोग गंभीर रुप से बीमार हैं वो इस समय यात्रा न करें।

श्रमिकों से नहीं लिए जा रहे पैसे
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने एक बार फिर कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में श्रमिक भाइयों से टिकट के पैसे नहीं लिए जा रहे हैं। 85 फीसदी केन्द्र और 15 फीसदी राज्य सरकार फेयर वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम नॉर्मलसी की तरफ बढ़ेंगे, ट्रेनों को आवश्यकता के अनुसार चलाई जाएगी। साथ भी उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक जरूरत होगी, श्रमिक स्पेशल ट्रेने चलाई जाती रहेंगी।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।