दैनिक भास्कर हिंदी: आधार बेहद सुरक्षित, सुपर कंप्यूटर भी हैक नहीं कर सकते इसे : UIDAI

March 23rd, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आधार स्कीम्स को लेकर यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के CEO अजय भूषण पांडे ने गुरुवार को प्रेजेंटेशन दिया। इस दौरान अजय भूषण पांडे ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अगुवाई वाली बेंच और पिटीशनर्स को आधार की खूबियां गिनाई, साथ ही ये भी बताया कि आधार डाटा को कभी हैक नहीं किया जा सकता। उन्होंने करीब 85 मिनट तक कोर्ट में पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया और बताया कि दुनिया के सुपर कंप्यूटर भी इसके एनक्रिप्शन को ब्रेक नहीं कर सकते। हालांकि गुरुवार को पूरा प्रेजेंटेशन नहीं हो पाया और अब अगले मंगलवार को बाकी का प्रेजेंटेशन होगा। 

UIDAI ने सुप्रीम कोर्ट में क्या बताया?

- UIDAI के CEO अजय भूषण पांडे ने बताया कि आधार का पूरा डाटा 2048 बिट एनक्रिप्शन से सेफ है। इसके लिए बायोमैट्रिक डाटा मैचिंग की तकनीक का लाइसेंस दुनिया की बेहतरीन कंपनी से लिया है। हालांकि इसका इस्तेमाल हमारे सर्वर से ही होता है। 

- आधार में 3 नंबर का एक लॉक सिस्टम है और इसका एनक्रिप्शन इतना सेफ है कि दुनिया के सुपर कंप्यूटर्स को भी इसे तोड़ने के लिए ब्रह्मांड की उम्र (एज ऑफ यूनिवर्स) के बराबर समय लग जाएगा। 

- एक आधार कार्ड पर एक डॉलर से भी कम का खर्चा आता है। आधार प्रोजेक्ट पर सरकार अब तक 9 हजार करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। आधार के डाटा लीक पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वो झूठ है। हां ये सच है कि बायोमैट्रिक सॉफ्टेयर बाहर का है, लेकिन डाटा कंट्रोल हमारे पास ही है। 

- आधार के लिए जो बायोमैट्रिक डाटा लिया गया है, उसे किसी के साथ शेयर नहीं किया जाता है। सिर्फ KYC के लिए ही निजी जानकारी दी जाती है। अगर कोई आधार के जरिए भी ट्रांजेक्शन करता है, तो UIDAI लोकेशन  या ट्रांजेक्शन की जानकारी भी नहीं ली जाती है। 

- अगर बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन कभी फेल भी होता है, तो उसको ऑथेंटिकेट करने के भी कई तरीके हैं। जैसे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर व्यक्ति को OTP आता है। इसके अलावा E-KYC सिस्टम भी है।

- आधार के जरिए किसी भी व्यक्ति की प्रोफाइलिंग भी नहीं की जा सकती है। अगर कोई आधार के जरिए बैंक अकाउंट खुलवाता है या फिर मोबाइल फोन लेता है, तो हम बैंक अकाउंट नंबर या फोन नंबर नहीं जान सकते हैं। 

- आधार के लिए लोगों से भी कम जानकारी ही ली जाती है। उनसे सिर्फ फोटो, डेमोग्राफिक्स, फिंगर प्रिंट्स, आईरिस आइडेंटिफिकेशन लिया जाता है। एक बार जब एजेंसी बायोमैट्रिक डाटा को भेज देती है, तो उस डाटा को एनक्रिप्टेड करके सेंट्रल आइडेंटिटी डाटा रेस्पोरेटरी (CIDR) के पास भेज दिया जाता है। जहां ये पूरी तरह सुरक्षित है।

13 फीट ऊंची और 5 फीट मोटी दीवार के पीछे आधार सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट के सवाल, UIDAI के जवाब

सुप्रीम कोर्ट : आधार एनरोलमेंट करने वाले 6.83 लाख प्राइवेट ऑपरेटर्स में से 49,000 को ब्लैक लिस्ट क्यों कर दिया गया?

UIDAI : आधार का एनरोलमेंट पूरी तरह से फ्री किया जाता है। हमें इस बारे में कई शिकायत मिल रही थी, कि आधार ऑपरेटर्स 300 रुपए तक ले रहे हैं। इसके साथ ही ये लोग लोगों की गलत जानकारी भी फीड कर रहे थे। सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस अपना रही है, इसलिए उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट : क्या आपके पास ऐसा कोई डाटा है, जिससे ये पता लगे कि आधार नहीं होने से अभी तक कितने लोगों को फायदे से वंचित रखा गया?

UIDAI : हमारे पास ऐसा तो कोई डाटा नहीं है, लेकिन आधार नहीं होने के कारण किसी भी फायदों से वंचित नहीं रखा जाएगा। अथॉरिटिज और कैबिनेट सेक्रेटरी इस बारे में सर्कुलर भी जारी कर चुके हैं। 

जुलाई से आधार में फेस आईडी लागू होगी

UIDAI के CEO अजय भूषण पांडे ने बताया कि जुलाई 2018 से आधार कार्ड के लिए फेस आईडी लागू करने की योजना है। अगर किसी के बायोमैट्रिक मैच नहीं करते हैं, तो इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। आधार सभी के लिए और सभी सेवाओं के लिए है। चाहे वो गरीब हो, बच्चे हो या फिर दिव्यांग या बेघर हो।

आधार लिंकिंग की डेडलाइन अनिश्चितकालीन बढ़ी

इससे पहले 13 मार्च को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आधार लिंकिंग की डेडलाइन को अनिश्चितकालीन समय तक बढ़ा दिया था। कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि जब तक आधार की वैलिडिटी पर कोई फैसला नहीं आ जाता तब तक आधार लिंकिंग की डेडलाइन को बढ़ाया जाता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि 'मोबाइल, बैंक, पासपोर्ट जैसी सेवाओं के लिए आधार फिलहाल जरूरी नहीं है। हालांकि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार जरूरी है।' बता दें कि इससे पहले 15 दिसंबर को सरकार ने आधार लिंकिंग की डेडलाइन को 31 दिसंबर 2017 से बढ़ाकर 31 मार्च 2018 तक कर दिया था।

कौन कर रहा है इसकी सुनवाई? 

आधार की वैलिडिटी को चुनौती देने वाली पिटीशंस पर सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा की अगुवाई में 5 जजों की बेंच बनाई गई है। इस बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं।

क्यों हो रही है आधार पर सुनवाई? 

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में आधार की अनिवार्यता के खिलाफ सुनवाई की गई थी, जिसपर फैसला देते हुए कोर्ट ने इसे संविधान के तहत निजता का अधिकार माना था। कोर्ट ने कहा था कि ये व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। उस वक्त पिटीशनर्स का कहना था कि आधार को हर चीज से लिंक कराना निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) का उल्लंघन है। पिटीशन में कहा गया था कि इससे संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने इसे निजता का अधिकार माना था।