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दैनिक भास्कर हिंदी: किसान आंदोलन का 44वां दिनः 8वें राउंड की बैठक रही बेनतीजा, सरकार और किसानों के बीच दिखी तल्खी, बोले-  क्या चाहते हैं बता दीजिए 

January 8th, 2021

हाईलाइट

  • विज्ञान भवन में आठवें राउंड की वार्ता
  • सकारात्मक नतीजे निकलने की उम्मीद
  • दो प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होनी है

डिजिटल डेस्क ( भोपाल)।  केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच शुक्रवार को विज्ञान भवन में आठवें राउंड की वार्ता में भी कोई हल नहीं निकला। अब किसान यूनियन और सरकार दोनों ने 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक का निर्णय लिया है।  किसान नेताओं से मुलाकात के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज किसान यूनियन के साथ तीनों कृषि क़ानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला। सरकार की तरफ से कहा गया कि क़ानूनों को वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प दिया जाए, परन्तु कोई विकल्प नहीं मिला। मुझे आशा है कि 15 जनवरी को कोई समाधान निकलेगा। 

विज्ञान भवन में ढाई बजे से बैठक शुरू होने से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर भेंट की। इस दौरान तीनों मंत्रियों के बीच बैठक को लेकर रणनीति बनी। अमित शाह से मिलकर बाहर निकले कृषि मंत्री तोमर ने मीडिया से बातचीत के दौरान आज की बैठक से सकारात्मक नतीजे निकलने की उम्मीद जताई थी। हालांकि, शुरुआती बातचीत में ही किसानों और सरकार के बीच तल्खी देखने को मिली। क्योंकि सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह कृषि बिल वापसी के अलावा कुछ बात है तो करने के लिए तैयार है। ऐसे में किसानों ने कहा कि अगर आपका मन नहीं है तो बता दीजिए, हम चले जाते हैं। 

कृषि क़ानूनों का समर्थन कर रहे किसान संगठनों को बैठक में शामिल करने के सवाल पर  केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 'अभी इस प्रकार का कोई विचार नहीं है, अभी हम आंदोलन कर रहे पक्ष से बात कर रहे हैं, परन्तु अगर आवश्यकता पड़ी तो आने वाले समय में सरकार इसपर विचार कर सकती है'।

किसान यूनियनों और सरकार की बैठक पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि 'केवल इन तीन क़ानूनों को ख़त्म करने, न करने का विषय नहीं है, उसके अंदर कई प्रावधान हैं जिसपर बात चल रही है। अगर सिर्फ कृषि क़ानूनों को वापस लेने तक की बात होती तो अब तक ये बातचीत समाप्त हो चुकी होती'। 

तारीख पर तारीख चल रही है। बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज़ में बिल रद्द करने की मांग की। हम चाहते हैं बिल वापस हो, सरकार चाहती है संशोधन हो। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी: राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता

 इससे पहले 4 जनवरी को हुई पिछली बैठक में सिर्फ तीनों कृषि कानून के मुद्दे पर ही दोनों पक्षों में बातचीत हो पाई थी, एमएसपी के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। ऐसे में किसान नेताओं का कहना है कि आज की बैठक में एमएसपी की कानूनी गारंटी पर भी खास तौर से चर्चा होनी थी।

बता दें कि कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर पहले ही कह चुके हैं कि कृषि कनूनों की वापसी नहीं होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कानूनों की वापसी की जगह जरूरी संशोधन करने को वह तैयार है। लेकिन किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि वे संशोधन नहीं बल्कि कानूनों की वापसी चाहते हैं। इसके पहले विज्ञान भवन के सामने लंगर की भी व्यव्स्था किसानों के लिए की गई। उन्होंने हमेशा की तरह सरकार का नमक नहीं खाया। 

 

 

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