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पाकिस्तान की राजधानी में हिंदुओं का पहला मंदिर और श्मशान घाट

June 24th, 2020 15:30 IST
 पाकिस्तान की राजधानी में हिंदुओं का पहला मंदिर और श्मशान घाट

हाईलाइट

  • पाकिस्तान की राजधानी में हिंदुओं का पहला मंदिर और श्मशान घाट

इस्लामाबाद, 24 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रहने वाले हिंदू समुदाय को आखिरकार अब एक सुव्यवस्थित मंदिर मिल जाएगा, जिससे वह शहर में ही पूजा-पाठ कर सकेंगे और उन्हें अपने धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शहर से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। मंदिर के साथ ही हिंदू समुदाय को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट भी नसीब हो सकेगा। उन्हें शहर में पहली बार मंदिर के साथ ही श्मशान घाट की सुविधा मिल सकेगी।

इस्लामाबाद के एच-9 सेक्टर क्षेत्र में एक सादा समारोह आयोजित किया गया, जिसमें राजधानी के पहले हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए चार कनाल भूमि का आवंटन किया गया।

मानवाधिकार मामलों के संसदीय सचिव लाल चंद मल्ही ने समारोह आयोजित किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में राजधानी में हिंदू आबादी काफी बढ़ी है, जिससे उनके पूजा करने के लिए मंदिर बनाना महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने कहा, इस्लामाबाद में हिंदू समुदाय लंबे समय से मंदिर बनाने की मांग कर रहा है। यहां कई हिंदू मंदिर खंडहर की हालत में हैं। इसके अलावा इस्लामाबाद में कोई श्मशान घाट नहीं है।

इस्लामाबाद हिंदू पंचायत ने इस मंदिर का नाम श्री कृष्ण मंदिर रखा है, जिसका निर्माण एच-9/2 में कम से कम 20,000 वर्ग फीट क्षेत्र में किया जाना है। राजधानी विकास प्राधिकरण (सीडीए) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेशों के अनुसार 2017 में मंदिर के लिए यह क्षेत्र आवंटित किया था।

मंदिर निर्माण की मंजूरी मिलने के बाद सीडीए और अन्य अधिकारियों द्वारा साइट मानचित्र की मंजूरी जैसी औपचारिकताओं को पूरा करने देरी हुई, जिससे हिंदू समुदाय का मंदिर के लिए इंतजार और भी लंबा हो गया।

साइट मानचित्र के अनुसार, मंदिर परिसर में तमाम धार्मिक संस्कारों की अलग-अलग जगहें होंगी और साथ ही एक श्मशान घाट के लिए भी जगह निर्धारित की गई है।

धार्मिक मामलों के मंत्री पीर नूरुल हक कादरी ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार इस मंदिर निर्माण की लागत को वहन करेगी, जिसमें करीब 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपये खर्च होगा।

कादरी ने प्रधानमंत्री इमरान खान के सामने इस मामले को भी उठाया है, ताकि मंदिर के निर्माण और रखरखाव के लिए इसे विशेष अनुदान दिया जा सके।

पाकिस्तान की राजधानी में हिंदू मंदिर के निर्माण की मंजूरी ऐसे समय में आई है, जब पाकिस्तान सरकार मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार की यह कहकर आलोचना कर रही है कि वह भारतीय मुसलमानों पर अत्याचार कर रही है, मस्जिदों के दरवाजे बंद कर रही है और बाबरी मस्जिद स्थल पर हिंदू मंदिर बनाने की अनुमति दे रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।