दैनिक भास्कर हिंदी: हिमाचल की पूर्व राज्यपाल उर्मिला सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन

May 30th, 2018

डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश की पूर्व राज्यपाल उर्मिला सिंह का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उर्मिला सिंह 72 साल की थी। ब्रेन से संबंधित बीमारी से पीड़ित उर्मिला का इंदौर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। इंदौर के इस अस्पताल में उन्होंने शाम पांच बजे अपनी अंतिम सांस ली। उर्मिला सिंह का अंतिम संस्कार उनके गृह जिले सिवनी के गृह ग्राम घूरवाड़ा में 31 मई गुरुवार सुबह 11 बजे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

सीएम शिवराज ने जताया शोक
उर्मिला सिंह राजनीति में काफी सक्रिय और कद्दावर नेता के रूप में जानी जाती थीं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उर्मिला के निधन पर शोक व्यक्त किया हैं। उन्होंने कहा, हिमाचल प्रदेश की पूर्व राज्यपाल श्रीमती उर्मिला सिंह के निधन पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें व शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें। 

 

 

छोटी उम्र में हो गई थी उर्मिला की शादी
उर्मिला सिंह का जन्‍म मध्य प्रदेश राज्य के रायपुर जिले के फिंगेश्वर गांव में 6 अगस्‍त 1946 को हुआ था, ये अब छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत आता है। उनके पिता राजा नटवर सिंह एक स्‍वतंत्रता सेनानी थे। उर्मिला ने बीए और एलएलबी की उपाधि प्राप्‍त की थी। छत्तीसगढ़ राज्‍य के राजकुमार बिरेन्‍द्र बहादुर सिंह से उर्मिला की शादी छोटी उम्र में ही हो गई थी। उनकी एक पुत्री और दो पुत्र हैं। उर्मिला के पुत्र योगेंद्र सिंह लखनादौन से कांग्रेस विधायक हैं। 

पति की मौत के बाद राजनीति में रखा कदम
उर्मिला ने अपने पति बिरेन्द्र बहादुर की मौत के बाद राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने उनके पति की चुनावी सीट घौनसोर से ही पहली बार चुनाव लड़ा था। वे 1983 से 2003 तक लगातार चुनाव जीतकर मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्‍य बनीं। इस अवधि के दौरान वह प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री बनीं। सबसे पहले वर्ष 1993 में उनको वित्त और डेयरी विकास राज्य मंत्री का पद (पोर्टफोलियो) दिया गया था, जहां पर उन्होंने वर्ष 1995 तक सेवा की।

हिमाचल की राज्यपाल भी रह चुकी हैं उर्मिला सिंह
इसके बाद वर्ष 1998 में उर्मिला को समाज कल्याण और जनजातीय कल्याण मंत्री बनाया गया, जहां पर उन्होंने वर्ष 2003 तक कार्यभार संभाला। वर्ष 2007 में भारत सरकार ने उनको भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338-ए के तहत स्थापित एक संवैधानिक आयोग के द्वारा भारतीय अनुसूचित जनजातियों की राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया। 25 जनवरी 2010 को उन्होंने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का पद ग्रहण किया था।