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दैनिक भास्कर हिंदी: GANGRAPE: निर्भया के अलावा दरिंदगी की वो 5 बड़ी घटनाएं, जिनसे हैवान की रूह कांप जाए

March 21st, 2020

हाईलाइट

  • निर्भया के अलावा हैवानियत की वो पांच बड़ी घटना
  • हैवानों ने छोटी बच्चियों को बनाया हवस का शिकार
  • कानून व्यवस्था के बावजूद भी महिलाएं असुरक्षित

डिजिटल डेस्क, मुंबई। दिल्ली निर्भया गैंगरेप केस में चारों दोषियों को आज (20 मार्च 2020) को फांसी दे दी गई है, लेकिन हमारे देश की कानून व्यवस्था के लिए यह विडंबना ही कहेंगे कि निर्भया को इंसाफ देने में 7 साल 3 महीने और 3 दिन का लंबा वक्त लगा। इस दौरान निर्भया के परिजनों को हमारी कानून व्यवस्था पर विश्वास रखते हुए एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। हालांकि, भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कानून हैं, बावजूद इसके महिलाओं के साथ भारत में सबसे ज्यादा क्राइम होते हैं। कई बार महिलाओं के प्रति हुई दरिंदगी से पूरे देश में गुस्से का माहौल पैदा होता है, लेकिन फिर भी कुछ नहीं बदलता। हालत ये है कि टीवी या अखबार खोलते ही 8 से 10 दुष्कर्म की घटनाएं हमारे सामने होती है।

कभी कभी तो ये घटनाएं इतनी हृदयविदारक और नृशंस होती है कि आम आदमी की रूह तक कांप जाती है। कई समाज के ठेकेदार दुष्कर्म की घटनाओं को महिलाओं के पहनावे को मानते हैं, लेकिन  उन घटनाओं का क्या जिनमें दरिंदे 2 माह की बच्ची तक को अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं। देश में ऐसी घटनाओं के कई उदाहरण हैं। ऐसे में 2 महीने की बच्ची को एक मां कैसे साड़ी या बुरखा में लपेटे ये सोचने वाली बात है। NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के अनुसार भारत में हर घंटे औसतन तीन महिलाएं हैवानियत का शिकार होती हैं। साल 2015 में 34,651 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुई थीं। हर साल इस बढ़ते आंकड़े के बावजूद भी कुछ नहीं बदला। आइए जानते हैं निर्भया के अलावा हैवानियत की वो 5 बड़ी घटना, जिन्होंने मानवता को शर्मसार करने के साथ ही पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। 

निर्भया दुष्कर्म और हत्या केस
16 दिसंबर 2012 को सर्द रात में दिल्ली की एक मेडिकल छात्रा के साथ 6 दरिंदों ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया। साथ ही उसके प्राइवेट पार्ट में जंग लगा रॉड डाला गया, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई और वो इलाज के दौरान सिंगापुर में जिंदगी की जंग हार गई। घटना के 6 दोषियों में एक दोषी नाबालिग था जिसे 3 साल के लिए बाल सुधारागृह में रखा गया था। तो वहीं, एक दोषी ने जेल के भीतर आत्महत्या कर ली थी। बांकि के चार दोषियों को घटना केसाल 3 महीने और 3 दिन के बाद 20 मार्च को सुबह 5:30 बजे फांसी दी गई।

उन्नाव दुष्कर्म और हत्या केस
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में सुनवाई के लिए कोर्ट जाते समय रास्ते में एक 23 वर्षीय रेप पीड़िता को जला दिया गया था। खबरों की मानें तो पीड़िता मदद मांगने के लिए जली हुई हालत में करीब एक किलोमीटर तक भागी थी और आखिरकार हारकर उसने पुलिस को कॉल किया था। हालांकि कुछ दिनों ​​बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। आरोप है कि पीड़िता के बलात्कारी ने ही उसपर मि​ट्टी का तेल छिड़क कर उसे जला दिया था। भारत में बढ़ते बलात्कार के मामलों के बीच 15 दिनों के भीतर यह दूसरी घटना थी जब किसी बलात्कार पीड़िता को जला कर मार दिया गया हो।

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कठुआ दुष्कर्म और हत्या केस
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से पूरा देश सहम गया था। 10 जनवरी 2018 को गुम हुई बच्ची का शव 17 जनवरी को मिला। पूरे 7 दिन तक उस बच्ची ने जिस दरिंदगी को सहा उसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती है। इस सनसनीखेज गैंग रेप के बाद देश भर में गुस्सा देखा गया था। पूर्व सरकारी अधिकारी सांजी राम को इस मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा था। पठानकोट की फास्ट ट्रैक अदालत ने राम को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है। वहीं, सबूतों के अभाव में सांजी राम के बेटे को अदालत ने रिहा कर दिया है। इसके साथ ही दो पुलिस वालों को भी पांच-पांच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई गई। घटना के 3 दोषी को जहां उम्र कैद की सजा सुनाई गई, वहीं 3 दोषी को 5-5 साल की सजा सुनाई गई। 

हैदराबाद दुष्कर्म और हत्या केस
हैदराबाद में 28 नवंबर को चार आरोपियों ने मिलकर महिला डॉक्टर के साथ सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया था और बाद में उसकी हत्या कर शव को जला दिया गया था। आरोपियों पर आरोप था कि उन्होंने जानबूझकर युवती की स्कूटी पंक्चर की थी और मदद करने के बहाने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। रेप और मर्डर की इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्सा था और इस मामले की सुनवाई के लिए फॉस्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया था। हालांकि तेलंगाना पुलिस ने चारों आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया था। पुलिस ने दावा किया कि ये सभी आरोपी भागने की कोशिश कर रहे थे और इस दौरान पुलिस की ओर से हुई फायरिंग में सभी आरोपी मारे गए। 

हिसार में 5 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म
हरियाणा के हिसार में हैवानियत की वो हदें पार हुई जिसने मानव जाति को शर्मसार कर दिया था। अपनी मां के साथ सो रही 5 वर्षीय बच्ची का अपहरण करने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया गया। दुष्कर्म के बाद बच्ची के प्राइवेट पार्ट में लकड़ी डाल दी गई, जिससे बच्ची की गर्भाशय और आंत जख्मी हो गए और उसकी मौत हो गई। हैवानियत के बाद देश भर में दोषियों की गिरफ्तारी की मांग उठने लगी और बच्ची की मां ने सभी दोषियों के फांसी की मांग की। 

दिल्ली में 21 महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म
मई, 2017 में दिल्ली के गांधीनगर इलाके में 21 महीने की बच्ची के साथ उसके ही परिजन ने दुष्कर्म को अंजाम दिा। पुलिस के अनुसार पीड़ित बच्ची के पिता ने अपने दोस्त के पास अपनी बेटी को खेलने के लिए छोड़ा था। इसी दौरान आरोपी ने बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। जब बच्ची को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया तब पता चला कि आरोपी ने बच्ची के साथ काफी समय तक रेप किया था। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

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एनसीआरबी के आंकड़ा
NCRB के आंकड़े के हिसाब से महिलाओं के लिए बलात्कार का खतरा पिछले 17 सालों की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2001‐2017 के बीच पूरे भारत में कुल 4,15,786 बलात्ककार के मामले दर्ज हुए। पिछले 17 सालों के दौरान पूरे देश में प्रतिदिन औसतन 67 महिलाओं के साथ बलात्कार हुए। अगर प्रतिशत के बजाय बलात्कार केस की वास्तविक संख्या की बात करें तो मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है। मध्य प्रदेश में 2001 में जहां बलात्कार के 2851 केस दर्ज हुए थे, वहीं 2017 में 5562 केस दर्ज हुए। वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है जहां पर सबसे ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज हुए। उत्तर प्रदेश में 2017 में कुल 4246 मामले दर्ज हुए। इसके बाद राजस्थान में 3305 और केरल में 2003 मामले दर्ज किए गए। ये वो आंकड़े हैं जो दर्ज हुए हैं, लेकिन इसके अलावा कई ऐसे मामले हैं जो ना कबी दर्ज हुए और ना ही कभी खबरों में आई। 

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