दैनिक भास्कर हिंदी: वैक्सीन पर खुशखबर: स्वदेशी कोवैक्सिन पहले ट्रायल में सेफ और इफेक्टिव, नहीं दिखा कोई प्रतिकूल प्रभाव

December 17th, 2020

हाईलाइट

  • माइल्ड साइड इफेक्ट दिखे, वे भी ठीक हुए
  • वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच स्टोर किया जा सकेगा
  • 375 वॉलंटियर्स को 14 दिन के अंतर से डोज दिए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन 'कोवैक्सीन' के बुधवार को क्लीनिकल ट्रायल के प्रथम चरण के परिणाम सामने आए। कोवैक्सिन बना रही कंपनी भारत बायोटेक की ओर मिली जानकारी के अनुसार कोवैक्सिन के फेज-1 ट्रायल्स के नतीजे विदेशी जर्नल मेड-आर्काइव (medRxiv) में आए हैं। इसमें दावा किया गया कि वैक्सीन पूरी तरह से सेफ और इफेक्टिव है। पहले चरण के क्लीनिकल ट्रायल में वैक्सीन ने शरीर में एंटीबॉडी बनाई है और इस दौरान कोई प्रतिकूल प्रभाव देखने को नहीं मिला है।

बता दें कि हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने यह वैक्सीन इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के साथ मिलकर डेवलप की है। कंपनी ने कहा कि प्रथम चरण के टीकाकरण के बाद कोई गंभीर परेशानी नहीं हुई और जो थीं वो दवा के बिना तेजी से ठीक हो गईं। इंजेक्शन जहां लगाया गया, उस जगह पर उठा दर्द भी खुद ब खुद ही ठीक हो गया। उल्लेखनीय है कि कोवैक्सीन उन तीन वैक्सीन में शामिल है जिनके आपातकालीन इस्तेमाल के लिए सरकार के पास आवेदन किया गया है। कोवैक्सिन उन तीन वैक्सीन में से एक है, जिसके लिए ड्रग रेगुलेटर से इमरजेंसी अप्रूवल मांगा गया है। नवंबर में ही इस वैक्सीन के देशभर में 25 साइट्स पर 25,800 लोगों पर फेज-3 ट्रायल्स शुरू हुए हैं। 

11 अस्पतालों में 375 वॉलंटियर्स को दिए गए थे डोज 
हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने कुल 11 अस्पतालों में 375 वॉलंटियर्स को तीन ग्रुप्स में परीक्षण में शामिल किया गया था। उन्हें अलग-अलग मात्रा में डोज दिए गए। दो डोज 14 दिन के अंतर से दिए गए। पोर्टल 'मेडआरएक्सआईवी' पर उपलब्ध कराए गए नतीजों के मुताबिक टीके ने एंटीबॉडी तैयार करने काम किया। गंभीर असर की एक घटना सामने आई, जिसका टीकाकरण से कोई जुड़ाव नहीं पाया गया। इसमें बताया गया है कि वैक्सीन को दो से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान पर रखा गया।  

एक परिणाम में प्रतिकूल असर दिखाई दिया
परिणाम के मुताबिक प्रतिकूल असर का एक गंभीर मामला सामने आया। प्रतिभागी को 30 जुलाई को टीके की खुराक दी गई थी। पांच दिन बाद प्रतिभागी में कोविड-19 के लक्षण पाए गए और सार्स-कोव 2 से उसे संक्रमित पाया गया। इसमें कहा गया कि ये हल्के किस्म के लक्षण थे, लेकिन मरीज को 15 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया। न्यूक्लिक एसिड परिणाम नकारात्मक आने पर प्रतिभागी को 22 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह मामला टीका के साथ जुड़ा हुआ नहीं था।

वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच स्टोर किया जा सकेगा
रिपोर्ट कहती है कि इस वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच स्टोर किया जा सकता है। यह नेशनल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम की कोल्ड चेन जरूरतों के मुताबिक है। दोनों ही फॉर्मूलों को फेज-2 इम्युनोजेनेसिटी ट्रायल्स के लिए चुना गया था। कोवैक्सिन के फेज-2 ट्रायल्स खत्म हो चुके हैं। पर उसके नतीजे अब तक सामने नहीं आए हैं।