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गोलियों की आवाज, खाली जेब : कश्मीर से एयरलिफ्ट किए प्रवासियों ने लॉकडाउन के डर को याद किया

June 13th, 2020 17:01 IST
 गोलियों की आवाज, खाली जेब : कश्मीर से एयरलिफ्ट किए प्रवासियों ने लॉकडाउन के डर को याद किया

हाईलाइट

  • गोलियों की आवाज, खाली जेब : कश्मीर से एयरलिफ्ट किए प्रवासियों ने लॉकडाउन के डर को याद किया

नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। भले ही कोविड-19 महामारी के मद्देनजर लागू किए गए राष्ट्रव्यापी बंद के तहत निर्धारित प्रतिबंध अब धीरे-धीरे कम कर दिए गए हों और देश सामान्य दिनचर्या में वापस आ गया हो, मगर अभी भी ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें अपने घर पहुंचने का इंतजार है।

देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी कामगार ऐसे ही लोगों में से हैं। आईएएनएस ने उनमें से कुछ से मुलाकात की, जो आवागमन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से कश्मीर घाटी में लगभग तीन महीने से अटके हुए थे।

घाटी में फंसे इन मजदूरों पर तब जाकर ध्यान आकर्षित हुआ, जब उनकी दुर्दशा को उजागर करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने उनमें से 82 लोगों को बचाने के लिए एक मिनी एयरलिफ्ट ऑपरेशन को अंजाम दिया।

कश्मीर घाटी में सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए बिहार के रहने वाले मोहम्मद सद्दाम ने कहा, यह बहुत जटिल और तनावपूर्ण स्थिति थी। हम लॉकडाउन के पहले दिन से ही कश्मीर में फंसे हुए थे।

उन्होंने कहा, हम लॉकडाउन से कुछ महीने पहले घाटी में आए थे। हमारे आसपास का माहौल खूबसूरत जरूर था, मगर साथ ही यह परेशान करने वाला भी था। गोलियां दागे जाने और बम फटने की लगातार आवाजें आ रही थीं।

सद्दाम ने कहा, इस स्थिति में बच पाना बेहद मुश्किल लग रहा था, क्योंकि कभी-कभी हमें दिन में केवल एक बार भोजन मिलता था और किसी दिन तो एक बार भी खाना नसीब नहीं होता था।

मजदूरों का यह समूह नौकरियों की तलाश में जम्मू-कश्मीर गया था। उनकी अधिकांश बचत बहुत पहले खत्म हो गई थी। इसके बाद इन्होंने महसूस किया कि जरूरी चीजों का प्रबंध कर पाना बेहद मुश्किल है।

एक अन्य मजदूर मोहम्मद मारबोब ने कहा, हम अपनी रोटी के इंतजाम के लिए बिना किसी सुविधा के श्रीनगर में तीन महीने से अटके हुए थे। हमारी मदद करने के लिए कोई नहीं था, न तो सरकार और न ही स्थानीय लोग।

उन्होंने कहा, यह एक चमत्कार था, जो हम किसी तरह योगिता दीदी के संपर्क में आ गए। उन्होंने हमें दिलासा दिया और हमें अपने मूल स्थानों पर वापस भेजने का वादा किया। हम सभी बहुत लंबे समय के बाद काफी खुश हैं, क्योंकि ऐसा लगता है कि अब हम निश्चित रूप से अपने घरों में होंगे, हमारे प्रियजनों के बीच।

प्रवासी मजदूर ने कहा, लॉकडाउन के अलावा, कश्मीर में बहुत सारी दिक्कते हैं, चाहे वह कर्फ्यू हो या विरोध। न तो वहां कोई दुकान खुली थी और न ही राशन उपलब्ध था। जीवित रहना सबसे मुश्किल काम था। कोई नौकरी या पैसा नहीं होने के बावजूद, हम किसी तरह जीने के लिए इंतजाम कर रहे थे।

सरकार ने हालांकि महामारी के कारण हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए विभिन्न आर्थिक पैकेजों की घोषणा की हुई है, मगर जमीनी स्तर पर स्थिति गंभीर और डरावनी बनी हुई है और काफी लोग अभी भी बेरोजगार हैं और संघर्ष कर रहे हैं।

मोहम्मद मारबोब ने आईएएनएस से कहा, हमारे परिवारों ने हमें अधिकतम 500 रुपये से 1,000 रुपये तक की मदद की। लेकिन वे इस स्थिति में हमारी अधिक मदद करने के लिए समृद्ध नहीं हैं। हम रोजाना मजदूरी कर रोजाना खाने वाले लोग हैं। हम इतना नहीं कमाते हैं कि लंबे समय तक जीवित रह सकें।

जब फ्लाइट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट पर उतरी, तो सामाजिक कार्यकर्ता और उनकी टीम इन प्रवासियों का स्वागत करने के लिए मौजूद थी। उन्होंने मजदूरों को गमछा (तौलिया), सैनिटाइजर और मास्क प्रदान किए।

यहां से अब उन्हें उनके घरों में भेजा जाएगा।

भयाना ने आईएएनएस से कहा, लॉकडाउन के पहले दिन से ही जब हमें प्रवासी श्रमिकों के बारे में पता चला तो हम उन्हें वापस भेजने के काम में जुटे हुए हैं। हम बसों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इस बार हमने एयरलिफ्ट किया, क्योंकि वह श्रीनगर है और वहां बहुत आंतरिक जगहें हैं, जिससे वहां कोई बस और ट्रेन सुविधाएं काम नहीं करती।

भयाना ने बताया, दिल्ली से हमने बस की व्यवस्था की है, ताकि वे सीधे हवाई अड्डे से बिहार और उत्तर प्रदेश में अपने मूल स्थानों पर जा सकें।

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।