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दिल्ली HC का फैसला: 16 हजार पेड़ काटने पर फिलहाल रोक

June 25th, 2018 18:14 IST

हाईलाइट

  • दिल्ली हाईकोर्ट में पेड़ों की कटाई को लेकर होगी सुनवाई
  • कोर्ट के सामने एनबीसीसी रखेगा अपना पक्ष
  • सरकारी आवास के लिए काटे जा रहे हैं पेड़

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकारी आवासों के निर्माण के लिए नॉर्थ दिल्ली में करीब 16 हजार पेड़ काटे जाने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। केन्द्र से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद 16 हजार पेड़ काटे जाने थे। पर्यावरण एक्टिविस्ट डॉ कौशल कांत मिश्र ने इस पूरे मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में पेड़ न काटे जाने को लेकर अर्जी दाखिल की थी। आज फिर इस मामले को लेकर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एनबीसीसी के पक्ष को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए 4 जुलाई तक पेड़ो की कटाई पर रोक लगा दी।

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बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने आवास और पर्यावरण मंत्रालय के साथ एनबीसीसी, सीपीडब्यूडी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी को नोटिस भेजा था। डॉ कौशल कांत मिश्र ने जो अर्जी दायर की है उसमें कहां गया है कि जहां पड़े काटने हैं वो कॉलोनियां है सरोजनी नगर, नौरोजी नगर, नेताजी नगर, त्यागराज नगर, मोहम्मदपुर और कस्तूरबा नगर शामिल है। इस मामले में दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पर्यावरण सचिव को खत लिखा है। जिसमें प्रोजेक्ट रिपोर्ट दोबारा देने और पेड़ काटे जाने की बजाए आवास योजना को दूसरे इलाकों में शिफ्ट करने की बात कही थी। आम आदमी पार्टी ने भी केन्द्र सरकार के इस प्रोजेक्ट का विरोध शुरू कर दिया है। पार्टी इसके लिए न केवल लोगों को एकजुट कर रही है, बल्कि सोशल मीडिया और ग्राउंड लेवल पर भी कैंपेन चला रही है।

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आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस प्रॉजेक्ट के संदर्भ में केंद्र सरकार के साथ-साथ उपराज्यपाल अनिल बैजल को भी कटघरे में खड़ा किया है। भारद्वाज ने कहा कि बार-बार यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि दिल्ली सरकार ने नौरोजी नगर, नेताजी नगर, सरोजिनी नगर और आस-पास के इलाकों में 16 हजार पेड़ों को काटने की परमिशन दी है। जबकि नियमों के अनुसार जहां एक हेक्टेयर से ज्यादा बड़ी जमीन पर पेड़ काटने हों, उसके लिए दिल्ली सरकार नहीं, बल्कि सीधे उपराज्यपाल से परमिशन लेनी पड़ती है। फाइल नोटिंग से भी यह पता चला है कि इस प्रॉजेक्ट के लिए अप्रूवल एलजी ने दी थी। 

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इस आवास योजना का पुरजोर विरोध शुरू हो चुका है। सरोजिनी नगर इलाके में करीब पंद्रह सौ प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों को गले लगाकर "चिपको आंदोलन " की शुरूआत कर दी है। इसके साथ सोशल मीडिया के जरिए लोगों से पर्यावरण को बचाने की अपील की जा रही है। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।