comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

सुप्रीम कोर्ट में दिशा सालियन की मौत के मामले की जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई

October 07th, 2020 23:00 IST
 सुप्रीम कोर्ट में दिशा सालियन की मौत के मामले की जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट में दिशा सालियन की मौत के मामले की जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की एजेंसी की जांच के साथ-साथ सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सलियन की मौत की सीबीआई जांच की मांग की गई है, क्योंकि दोनों मामले आपस में जुड़े हुए (इंटर-लिंक्ड) हैं।

जनहित याचिका प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जिसमें न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और वी. रामसुब्रमण्यन शामिल हैं।

पुनीत कौर ढांडा द्वारा वकील विनीत ढांडा के माध्यम से दायर याचिका पर मुंबई पुलिस से मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट दर्ज करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है, क्योंकि यह बताया गया है कि उनकी केस फाइल गायब है या हटा दी गई है।

ढांडा ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि अगर अदालत ने इसे असंतोषजनक पाया है तो आगे की जांच के लिए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो को भेजा जा सकता है।

मुंबई के मलाड पश्चिम में एक आवासीय इमारत (रीजेंट गैलेक्सी) की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद आठ जून को सालियान की मृत्यु हो गई थी।

याचिका में कहा गया है, एक हफ्ते बाद 14 जून की सुबह सुशांत सिंह राजपूत ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली, जो संदेह पैदा करता है।

याचिका में दलील दी गई है कि सालियन अभिनेता रोहन राय के साथ एक रिश्ते में थीं, जो कुछ टीवी धारावाहिकों में दिखाई दिए हैं और कोविड-19 की वजह से लगाए गए राष्ट्रव्यापी बंद समाप्त होने के बाद वे शादी करने वाले थे।

याचिका में कहा गया है, मुंबई पुलिस को दिए गए एक पारिवारिक बयान के अनुसार, परिवार इस रिश्ते से खुश था। दंपति राष्ट्रव्यापी बंद खत्म होने का इंतजार कर रहा था और तुरंत शादी करना चाहता था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि बंद से ठीक पहले दिशा और रोहन ने मलाड वेस्ट की रीजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग में दो बीएचके फ्लैट लिया था।

याचिकाकर्ता ने जोर देकर कहा कि सुशांत और सालियन की मौत आपस में जुड़ी हुई हैं।

एकेके/एसजीके

कमेंट करें
7yOcA
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।