दिल्ली: आयुष के लिए नीट लागू नहीं होने के छात्रों के दावे पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

January 10th, 2022

हाईलाइट

  • खंड़पीठ ने केंद्र की सरकार की वकील मोनिका अरोड़ा से एलोपैथिक डॉक्टरों की याचिका का ब्योरा देने को कहा है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में छात्रों के एक समूह ने सोमवार को दायर एक याचिका में दावा किया कि आयुष पाठ्यक्रम राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) के तहत नहीं आ सकते क्योंकि यह परीक्षा आधुनिक वैज्ञानिक चिकित्सा तक ही सीमित है और इसमें पारंपरिक चिकित्सा पाठ्यक्रम शामिल नहीं हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने छह आयुष चिकित्सकों द्वारा दायर याचिका पर इस मामले में केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी का रुख जानने के लिए नोटिस जारी किया।

न्यायालय ने कहा भी कहा कि वह एलोपैथिक डॉक्टरों के एक समूह द्वारा दायर एक अन्य याचिका के साथ मामले की सुनवाई 30 मार्च को करेगा, जिन्होंने आयुष चिकित्सकों को कुछ प्रकार की सर्जरी करने की अनुमति देने के खिलाफ अदालत का रुख किया है।

खंड़पीठ ने केंद्र की सरकार की वकील मोनिका अरोड़ा से एलोपैथिक डॉक्टरों की याचिका का ब्योरा देने को भी कहा है।

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी भी की कि याचिका में दोहरा मापदंड है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए दोनों मामलों को सूचीबद्ध करते हुए कहा, एक तरफ जहां आप कह रहे हैं कि आप प्रतिस्पर्धी हैं।

लेकिन जब नीट में उपस्थित होने के लिए कहा गया, तो आप कह रहे हैं कि हम प्रतिस्पर्धी नहीं हैं।

आयुष उम्मीदवारों की याचिका में, यह तर्क दिया गया था कि उनके पाठ्यक्रम अलग तरह से संचालित होते हैं और वे चिकित्सा संस्थानों से मौलिक रूप से अलग हैं जो आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, या होम्योपैथी दवाओं में डिग्री, डिप्लोमा या लाइसेंस प्रदान करते हैं।

इसमें दावा किया गया है कि आयुष पाठ्यक्रमों के लिए नीट परीक्षा अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो कानून के समक्ष समानता या कानूनों के समान संरक्षण प्रदान करता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे प्रवेश परीक्षा प्रणाली के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि आयुष पाठ्यक्रमों आयुर्वेद, होम्योपैथी , यूनानी, सिद्ध और सोवा रिग्पा

में प्रवेश लेने के लिए नीट के खिलाफ हैं।

(आईएएनएस)