दैनिक भास्कर हिंदी: India-China face off: 15 जून की रात क्या हुआ था गलवान वैली में? जानिए चीन के धोखेबाजी की पूरी कहानी

June 21st, 2020

हाईलाइट

  • लद्दाक की गलवान घाटी में 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी
  • झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे और चीन के 43 सैनिक मारे गए थे
  • 15 जून की रात क्या हुआ था गलवान वैली में?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लद्दाक की गलवान घाटी में 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। जबकि चीन के भी 43 सैनिक मारे गए थे। हालांकि चीन की तरफ से आधिकारिक रूप से अब तक ये जानकारी नहीं दी गई है कि उसके कितने सैनिक मारे गए। दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर वार्ता में बनी सहमति के बाद भी ये हिंसक झड़प हुई थी। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि 15 जून की उस रात की पूरी कहानी कि कैसे ये घटना घटी?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जून की शाम इंडियन 3 इन्फैंट्री डिवीजन कमांडर और अन्य सीनियर ऑफिसर्स के साथ पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में श्योक और गलवान नदियों के वाई-जंक्शन के पास इंडियन पोस्ट पर थे क्योंकि दोनों देशों के बीच वार्ता होनी थी। ऐसे में16 बिहार रेजिमेंट सहित भारतीय सुरक्षा बलों को कहा गया कि वह इस बात को सुनिश्चित करें की भारतीय सीमा में बनाई गई चीनी पोस्ट हटाई गई है या नहीं? इसके बाद एक छोटी पेट्रोल को चीन पोस्ट देखने के लिए भेजा गया। चाइनीज ऑब्जर्वेशन पोस्ट पर 10-12 सैनिक मौजूद थे, जिन्हें इंडियन पेट्रोल ने वहां से चले जाने के लिए कहा। दोनों सेनाओं के बीच सीनियर लेवल की सैन्य वार्ता में इस पर सहमति बनी थी। लेकिन चीनी सैनिकों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद इंडियन पेट्रोल इस बारे में जानकारी देने के लिए अपने यूनिट में लौट गया।

इस जानकारी के बाद 16 बिहार कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू ने तय किया कि वे टीम के साथ खुद उस कैंप के पास जाएंगे और पूरी बात की जानकारी लेंगे कि आखिर ये पोस्ट अब तक क्यों नहीं  हटाया गया। तक तक चीनी सेना ने वहां पर 300-350 सैनिकों को जमा कर लिया था और ऊंचाई पर तैनात कर दिया था। भारतीय सैनिकों पर हमला करने के लिए चीनी सैनिकों ने पत्थर और हथियार भी तैयार रखे थे। उधर, 16 बिहार रेजिमेंट में गरमागर्मी का माहौल था। यूनिट के युवा सिपाही नाराज थे और वे खुद चीन के उस विवादित पोस्ट को उखाड़ फेंकना चाहते थे। लेकिन कर्नल बाबू का विचार दूसरा था। कर्नल बाबू अपनी यूनिट में बेहद सौम्य, शांत दिमाग से काम करने वाले ऑफिसर माने जाते थे। शाम करीब 7 बजे कर्नल बाबू अफसरों और जवानों की 50 लोगों की एक टीम के साथ पैदल ही उस पोस्ट पर पहुंचे।

जब कर्नल संतोष बाबू ने चीनी सैनिकों से बात करना शुरू की तो दोनों पक्षों के बीच बहस होने लगी और एक चीनी सैनिक ने कर्नल बाबू को पीछे से धक्का दे दिया। इस घटना के बाद दोनों पक्षों में मुक्के और घूंसों की लड़ाई हुई। करीब आधे घंटे तक चली इस लड़ाई में दोनों ओर से लोग चोटिल हुए, लेकिन भारतीय सैनिकों ने चीनी पोस्ट को उखाड़ फेंका। इस झगड़े से कर्नल बाबू चीनी सैनिकों का मिजाज भांप चुके थे और उन्होंने जख्मी सिपाहियों को वापस पोस्ट पर भेजकर ज्यादा जवान भेजने को कहा। अब तक विजिविलिटी भी काफी कम हो गई थी। चीन के सैनिक नदी के दोनों किनारों पर पोजिशन लेकर इंतजार कर रहे थे। इसके अलावा दाहिनी ओर भी एक रिज पर पोजिशन लेकर वे तैयार थे। करीब एक घंटे दोनों पक्षों में फिर से लड़ाई हुई और चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थरों, कील लगे रॉड और डंडों से हमला किया। भारत और चीन दोनों ओर के कई सैनिक गलवान नदी में गिर गए। इसमें भारत के कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल थे। 

यह लड़ाई देर रात तक चली जिसमें कई चीनी सैनिक या तो मारे गए या गंभीर रूप से घायल हो गए। कई भारतीय जवान भी शहीद हुए और घायल हुए। दोनों देश की सेनाओं ने रात में ही नदी में गिरे अपने घायल जवानों को उठाया और उन्हें इलाज के लिए भेजा। अगली सुबह जब स्थिति थोड़ी शांत हुई तो पाया गया कि अभी भी कई सैनिक वापस नहीं लौटे हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के मेजर जनरल ने बात की और दोनों पक्षों के 'लापता' सैनिकों को वापस करने पर सहमति बनी। दोनो पक्षों ने एक दूसरे के सैनिकों का उपचार भी किया। अब अगले कुछ दिनों में PP-14, PP-15 और PP-17A पर सिचवेशन को डिफ्यूज करने के लिए पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में भारतीय और चीनी लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता की योजना बनाई जा रही है।