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नेशनल हाईवे: Fastag नहीं होने पर आज से लगेगा दोगुना जुर्माना, जानिए फास्टैग के फायदे

नेशनल हाईवे: Fastag नहीं होने पर आज से लगेगा दोगुना जुर्माना, जानिए फास्टैग के फायदे

हाईलाइट

  • केंद्र सरकार के नए आदेश के बाद अनिवार्य हुआ Fastag
  • गाड़ी के सामने वाले शीशे पर चिपकाया जाता है Fastag
  • Fastag नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर उपलब्ध है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के नए आदेश के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल क्लेशन के लिए फास्टैग (FASTag) आज यानी बुधवार से ​अनिवार्य हो गया है। ऐसे में यदि नेशनल हाईवे से गुजरने वाली आपकी कार पर अब तक फास्टैग नहीं लगा है तो आपको दोगुना जुर्माना चुकाना पड़ सकता है। बता दें कि सरकार ने पहले राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल डिजिटली वसूलने के लिए फास्टैग अनिवार्य करने के लिए 1 दिसंबर की तिथि को 15 दिसंबर किया था, जिसे अब बढ़ा कर 15 जनवरी 2020 कर दिया गया था।

क्या है फास्टैग
फास्ट टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन है, जो नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर उपलब्ध है। यह रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी (RFID) पर आधारित एक स्टिकर है, जिसे गाड़ी के सामने वाले शीशे पर चिपकाया जाता है। टोल बूथ पर लगे RFID रीडर इसे स्कैन करेंगे। स्कैन करते ही आपके फास्टैग अकाउंट से पेमेंट हो जाएगी।  जिसकी जानकारी आपको SMS के जरिए मिलेगी।

यानी कि जब कोई वाहन टोल प्लाजा पर फास्टैग लेन से गुजरती है तो ऑटोमैटिक टोल चार्ज कट जाता है और आपको वाहन को रोकने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी कि अब आपको लंबी लाइन में नहीं लगना होगा। 

यहां से खरीद सकते हैं 
फास्टैग को ऑथराइज्ड बैंक एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीएफसी बैंक, सिंडिकेट बैंक, एसबीआई और एचडीएफसी बैंक से खरीदा जा सकता है। इसे आप कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंप, RTO, टोल प्लाजा और Paytm से भी खरीद सकते हैं। 

फास्टैग के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत
फास्टैग खरीदने के लिए आपके पास पहचान पत्र (ID) और एड्रेस प्रूफ के साथ-साथ वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) होनी जरूरी है। आपको इन डॉक्युमेन्ट्स की ओरिजिनल कॉपी भी साथ में ले जानी होगी ताकि वेरिफाई किया जा सके। आपको बता दें कि एक बार जारी किया गया फास्टैग 5 साल के लिए एक्टिवेट रहता है। हालांकि इसे समय पर रिचार्ज करना पड़ता है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।