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झारखंड में अब दल बदलुओं को हो सकती है परेशानी !

October 30th, 2019 08:56 IST
झारखंड में अब दल बदलुओं को हो सकती है परेशानी !

हाईलाइट

  • झारखंड में अब दल बदलुओं को हो सकती है परेशानी!

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक तिथि की घोषणा नहीं हुई है, परंतु राजनीतिक दलों के मैदान सजने लगे हैं। एक-एक सीट पर मतबूत दावेदारों की तलाश जारी है। इस तलाश में पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सेंधमारी कर कई दलों के विधायकों और नेताओं को अपने पाले में कर लिया है। परंतु महाराष्ट्र, हरियाणा के चुनाव परिणाम तथा बिहार के उपचुनाव के नतीजे ने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से राजनीतिक दलों को कुछ संदेश भी दे दिया है।

संदेश स्पष्ट है कि जनता दल बलदुओं को सिर माथे पर अब नहीं बैठाने वाली। ऐसे में दलबदलुओं के लिए परेशानी बढ़ गई है। इन तीनों राज्यों के मतदाताओं ने हालिया चुनाव में बड़े पैमाने पर दल बदलुओं को नकार दिया है, जिससे भाजपा के रणनीतिकार भी अपनी रणनीति में बदलाव करने में जुटे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में चुनाव से ठीक पहले विपक्षी दलों से भाजपा में शामिल हुए 19 प्रमुख चेहरों में से 11 लोग चुनाव हार गए। इनमें सतारा से उदयनराजे भोसले, हर्षवर्धन पाटील, वैभव पिचड और दिलीप सोपाल प्रमुख रूप से शामिल हैं।

चुनाव के पूर्व ऐसा नहीं कि दल बदल कर अन्य दलों में नेता नहीं पहुंचे हैं, परंतु इनमें सबसे अधिक संख्या में नेता भाजपा में आए हैं। अन्य दल भी दल बदल कर आने वाले नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। दल बदल होने के बाद कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी दृश्य बदलने की संभावना है। भाजपा संगठन से जुड़े एक नेता ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया, इन राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद पार्टी ने रणनीति बदली है। ऐसे में अन्य दलों से आए नेताओं को टिकट मिल ही जाए, इसमें संदेह है।

उल्लेखनीय है कि राज्य में हाल ही में विभिन्न दलों को छोड़कर पांच विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत, विधायक मनोज कुमार यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक कुणाल षाडंगी और ज़े पी़ पटेल ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। नौजवान संघर्ष मोर्चा के विधायक भानु प्रताप शाही ने तो अपने दल तक का विलय कर दिया। कुछ दिन पूर्व झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के विधायक प्रकाश राम भाजपा में शामिल हुए।

सूत्रों का कहना है कि पाला बदलने वाले ये तमाम विधायक अपने-अपने क्षेत्रों से टिकट की गारंटी पर ही भाजपा में शामिल हुए हैं, ऐसे में अब आगे की राह आसान नहीं दिखती। कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और भाजपा का दामन थाम चुके लोहरदगा के विधायक सुखदेव भगत कहते हैं, भाजपा में जाने के लिए कोई शर्त पहले तय नहीं हुई है। पार्टी को जहां मेरी उपयोगिता लगेगी, वहां मुझे जिम्मेदारी देगी। उन्होंने कहा कि टिकट कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।

झाविमो से भाजपा में आए लातेहार के विधायक प्रकाश राम ने भी आईएएनएस से भाजपा में जाने के पूर्व किसी भी डील को नकार दिया। उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में झारखंड और लातेहार विकास की ओर बढ़ा है, इस कारण भाजपा में गए हैं। उन्होंने कहा, विकास मेरी प्राथमिकता है, टिकट नहीं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के लिए जीतने वाले उम्मीदवार प्राथमिकता में हैं। उन्होंने सोमवार को जमशेदपुर कहा था, अन्य दलों से भजपा में आने वालों के लिए टिकट की गारंटी नहीं है। हमने टिकट देने का कोई वादा नहीं किया है, न गारंटी दी है। तीन संभावित उम्मीदवारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी, जिसमें एक उम्मीदवार बनेगा।

गिलुआ के इस बयान के बाद दल बदलने वाले विधायकों की चिंता बढ़ गई है। दल बदलने वाले विधायक हालांकि इस मामले में खुलकर बहुत कुछ नहीं बोल रहे हैं। झामुमो छोड़कर भाजपा में आए कुणाल षाडंगी आईएएनएस से कहते हैं, भाजपा में जाने को लेकर कंडीशन पहले से तय नहीं है। यह पार्टी को तय करना है कि वह टिकट देगी या नहीं। उन्होंने कहा, सम्मान पूर्वक मैंने झामुमो छोड़ी है और भाजपा का दामन थामा है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी झाविमो के छह विधायक पाला बदलकर भाजपाई हो चुके हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।