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10th National Voters' Day: जानें नागरिकों और निर्वाचन आयोग के लिए आखिर क्यों खास है ये दिन

January 25th, 2020 11:27 IST
10th National Voters' Day: जानें नागरिकों और निर्वाचन आयोग के लिए आखिर क्यों खास है ये दिन

हाईलाइट

  • 25 जनवरी 1950 को EC की स्थापना हुई थी
  • 2011 से राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जा रहा है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज यानी 25 जनवरी को सारा देश 10वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है। भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां जनता अपने लिए शासक का चयन करती है। इसी चयन प्रक्रिया में जनता को उनके वोट के प्रति जागरूक करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। इसकी शुरूआत में 25 जनवरी 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा की गई थी। इस दिन को भारत निर्वाचन आयोग (EC) की स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। EC की स्थापना आज ही के दिन 1950 में की गई थी।

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उद्देश्य
25 जनवरी का दिन वोट के महत्व को दर्शाता है। इसका मुख्य उद्देश्य 18 साल की अधिक उम्र के नागरिकों का मतदान की सूची में नामांकन में वृद्धि करना है। इसके अलावा इसका उद्देश्य वोटर्स को भारत के नागरिकों को उनके कर्तव्य और मतदान के अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, जिससे वह चुनाव के दौरान अपने लिए एक उचित नेता का चयन कर सके। इसके लिए हर साल कई शासकीय और गैर शासकीय संस्थानों में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। स्कूलों में बच्चों को नेश्नल वोटर्स डे के लिए प्रोजेक्ट्स तैयार कराए जाते हैं। इसके अलावा EC हर वर्ष एक स्पेशल थीम तय की जाती है और उसी थीम के अंतर्गत सालभर काम किया जाता है।

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थीम
10 वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के लिए EC द्वारा 'Electoral Literacy For Stronger Democracy' यानी 'मजबूत लोकतंत्र के लिए चुनावी साक्षरता' की थीम तय की गई है। इसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों को मतदान करने की जिम्मेदारी और इसके महत्व के बारे में शिक्षित करना है। इस थीम के अंतर्गत EC सालभर चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों के विश्वास को नवीनीकृत करने के लिए कई गतिविधियां आयोजित करेगा। जाने इससे पहले किन थीम के तहत नागरिकों को जागरूक करने के कार्य किए गए -

2019 : 'No Voter to be left behind'
2018 : 'Accessible Elections'
2017 : 'Empowering Young and Future Voters'
2016 : 'Inclusive and qualitative participation'
2015 : 'Easy Registration, Easy Correction'

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इतिहास
EC, एक ऑटोनोमस कॉन्सटीट्यूशनल अथॉरिटी है, जो देश में चुनाव प्रक्रियाओं के संचालन के लिए जिम्मेदार है। यह भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यालयों के लिए चुनावों का संचालन करता है। EC की स्थापना 1950 में की गई थी। साल 2011 में कांग्रेस सरकार के अधीन केंद्रीय कैबिनेट की एक बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने की। इस बैठक में तय किया गया कि 25 जनवरी को EC की स्थापना के अवसर पर हर साल राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाएगा।

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।