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Pakistan: भारतीय राजनयिकों ने कुलभूषण जाधव से मुलाकात की, पाक अधिकारी डराने-धमकाने वाले रवैये के साथ वहां मौजूद थे

Pakistan: भारतीय राजनयिकों ने कुलभूषण जाधव से मुलाकात की, पाक अधिकारी डराने-धमकाने वाले रवैये के साथ वहां मौजूद थे

हाईलाइट

  • भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव से मुलाकात की
  • भारत ने पाकिस्तान से बिना रोकटोक कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की थी
  • मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जाधव का कॉन्सुलर एक्सेस लगभग 3 घंटे चला

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय उच्चायोग के दो अधिकारियों ने गुरुवार को पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव से मुलाकात की। भारत ने पाकिस्तान से बिना रोकटोक कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की थी। लेकिन, कॉन्सुलर एक्सेस के दौरान भारतीय पक्ष के विरोध के बावजूद पाकिस्तानी अधिकारी डराने-धमकाने वाले रवैये के साथ वहां मौजूद थे। कुलभूषण जाधव तनाव में दिख रहे थे और उन्होंने राजनयिकों को इसके स्पष्ट संकेत भी दिए। बता दें कि पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने दावा किया था कि कुलभूषण जाधव ने सजा की समीक्षा याचिका दायर करने से इनकार कर दिया है।

भारतीय अधिकारियों ने एक कैमरा भी देखा, जिसका उपयोग उनकी बातचीत को रिकॉर्ड करने के लिए किया जा रहा था। कॉन्सुलर एक्सेस के लिए जिस तरह की व्यवस्था की गई थी उसमें जाधव के साथ खुलकर बात करना संभव नहीं था। भारत सरकार के बयान में कहा गया है कि कॉन्सुलर अधिकारी जाधव को उनके कानूनी अधिकारों में शामिल नहीं कर सके और उनकी कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के लिए उनकी लिखित सहमति प्राप्त करने से रोका गया। ऐसे में भारतीय राजनयिक विरोध दर्ज कराकर वहां से निकल गए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कुलभूषण से मिलने गए इस्लमाबाद स्थित अपने उच्चायोग के दो राजनयिकों से मिली रिपोर्ट के आधार पर यह जानकारी दी।

क्या कहा पाकिस्तान ने?
पाकिस्तान के फॉरेन ऑफिस की तरफ से जारी किए गए स्टेटमेंट के मुताबिक दोनों भारतीय अधिकारियों को कुलभूषण जाधव से मुलाकात के लिए दोपहर तीन बजे का समय दिया गया था। हालांकि मुलाकात की जगह को पूरी तरह से गुप्त रखा गया था। भारतीय राजनयिक- डेप्युटी हाई कमिश्नर गौरव अहलूवालिया और फर्स्ट जनरल सेक्रटरी चेराकुंग जेलियांग जिस गाड़ी से पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय पहुंचे थे, उसे वहीं छोड़ दिया गया और  जिस 'सब-जेल' में कुलभूषण थे उन्हें वहां तक दूसरी गाड़ी में ले जाया गया। 

2016 से पाकिस्तान की जेल में बंद है कुलभूषण
गौरतलब है कि कुलभूषण जाधव मार्च 2016 से पाकिस्तान की जेल में हैं। जाधव को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। जाधव तक राजनयिक पहुंच के पाकिस्तान के इनकार के बाद भारत ने मई 2017 में ICJ का रुख किया था। भारत ने कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाकिस्तान की सैन्य अदालत में 'फार्सिकल ट्रायल' को भी चुनौती दी थी। ICJ ने 18 मई, 2017 को फैसला आने तक पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव की मौत की सजा देने से रोक दिया था।

21 जुलाई को ICJ में भारत के पक्ष में फैसला
इसके बाद 21 जुलाई को आईसीजे ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाने के साथ ही भारत को कॉन्सुलर एक्सेस भी दिया था। ICJ में 15-1 से भारत के पक्ष में ये फैसला सुनाया गया था। कोर्ट ने कहा था कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव से संपर्क करने और उनके लिए कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने के अधिकार से भारत को वंचित किया। यह विएना संधि के तहत कॉन्सुलर रिलेशन नियमों का उल्लंघन है। 

पहला कॉन्सुलर एक्सेस 2 सितंबर 2019 को
विएना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस (वीसीआरसी) 1963 के तहत पाकिस्तान ने पहला कॉन्सुलर एक्सेस 2 सितंबर 2019 को प्रदान किया था। इससे पहले जाधव की मां और पत्नी को भी 25 दिसंबर 2017 को उनसे मिलने की अनुमति दी गई थी।  35 मिनट के करीब चली बैठक में, जाधव ने अपने परिवार से एक इंटरकॉम के माध्यम से बात की थी। इस दौरान दोनों के बीच कांच का पार्टिशन रखा गया था।

पाकिस्तान का झूठा दावा
पाकिस्तान ने ICJ में कहा था कि भारतीय नौसेना अधिकारी एक 'जासूस' था कोई व्यापारी नहीं। पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने जाधव को 3 मार्च, 2016 को ईरान से कथित तौर पर घुसने के बाद बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था। हालांकि, भारत का कहना है कि कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा किया गया था, जहां नौसेना से रिटायर होने के बाद उनके व्यापारिक हित थे।

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