दैनिक भास्कर हिंदी: भारत भी लॉन्च करेगा अपना स्पेस स्टेशन, ISRO चीफ ने की घोषणा

June 14th, 2019

हाईलाइट

  • भारत अपने खुद के स्पेस स्टेशन को लॉन्च करने की योजना बना रहा है
  • इसरो प्रमुख के सिवान ने गुरुवार को ये घोषणा की
  • ये महत्वाकांक्षी परियोजना गगनयान मिशन का विस्तार होगा

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। भारत अपने खुद के स्पेस स्टेशन को लॉन्च करने की योजना बना रहा है। चंद्रयान -2 की लॉन्च की तारीख की घोषणा करने के एक दिन बाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख के सिवान ने गुरुवार को ये घोषणा की। ये महत्वाकांक्षी परियोजना गगनयान मिशन का विस्तार होगा। गगनयान मिशन के जरिए भारत 2022 में पहली बार अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट भेजेगा। सिवान ने बताया कि भारत सबसे पहले जिस मॉड्यूल को स्पेस में लॉन्च करेगा उसका वजन लगभग 20 टन होगा।

स्पेस डॉकिंग टेक्नोलॉजी के बिना स्पेस स्टेशन को कार्यात्मक नहीं बनाया जा सकता। इस तरह की टेक्नोलॉजी पर भारत कम से कम तीन वर्षों से काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। स्पेस डॉकिंग टेक्नोलॉजी के जरिए एस्ट्रोनॉट को एक अंतरिक्ष यान से दूसरे में ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि भारत का तात्कालिक लक्ष्य स्पेस में पहले से मौजूद अंतरिक्ष यान की रिफ्यूलिंग और महत्वपूर्ण सिस्टमों को दूसरे यान के जरिए मौजूदा यान तक पहुंचाने में सक्षम बनना है।

स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट या SPADEX जैसा कि इसरो कहता है पहले ही कई प्रणालियों पर काम कर चुका है। जैसे सिग्नल विश्लेषण उपकरण, नेविगेशन के लिए हाई प्रिसिजन वीडियोमीटर और डॉकिंग सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक्स। ISRO ने कहा, SPADEX के हिस्से के रूप में, हम दो अंतरिक्ष यान (चेस एंड टारगेट) को डॉक करने के लिए आवश्यक तकनीकों का डेवलप और डेमोंस्ट्रेशन करेंगे। ISRO ने पहले ही कुछ जमीनी सिमुलेशन पूरे कर लिए हैं और अंतरिक्ष में इसका परीक्षण करने के लिए दो छोटे अंतरिक्ष यान लॉन्च करने का काम पाइपलाइन में है। 

डॉकिंग को लेकर ISRO के पास कई सारी चुनौतियां है। डॉकिंग को ऑटोमेटिक होना चाहिए और इसके बाद इसके कई कार्य रोबोट को करने होंगे। दोनों स्पेसक्राफ्ट की गति को मैनेज करने की भी चुनौती है जब वे एक-दूसरे के पास होंगे। इसके बाद नए स्पेसक्राफ्ट को इस तरह से डॉक करना होगा कि वे दुर्घटनाग्रस्त न हो या एक-दूसरे से टकराए नहीं।