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आज से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित राज्य, माथुर और मुर्मू ने ली उप-राज्यपाल पद की शपथ

आज से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित राज्य, माथुर और मुर्मू ने ली उप-राज्यपाल पद की शपथ

हाईलाइट

  • जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बना
  • बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा लद्दाख

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के लिए आज (31 अक्टूबर 2019) का दिन इतिहास बन गया है। आज से जम्मू-कश्मीर का राज्य के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया है। वहीं दो नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बन गए हैं। अनुच्छेद 370 के समाप्त होने के बाद यह निर्णय प्रभावी हुआ है। गृहमंत्रालय ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना में मंत्रालय के जम्मू-कश्मीर संभाग ने प्रदेश में केंद्रीय कानूनों को लागू करने समेत कई घोषणा की। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उपराज्यपाल गिरिश चंद्र मुर्मू और आर.के.माथुर होंगे। 

माथुर बने लद्दाख के पहले उपराज्यपाल
उपराज्यपाल के शपथग्रहण का आयोजन श्रीनगर और लेह में किया जाएगा। पहले आर.के.माथुर ने लेह में शपथ ली। उन्हें जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने शपथ दिलाई। माथुर त्रिपुरा कैडर के आईएएस अफसर हैं और रक्षा सचिव भी रह चुके हैं। आईएएस अधिकारी उमंग नरूला को आर.के.माथुर का सलाहकार नियुक्त किया है। वहीं श्रीनगर में गिरिश चंद्र मुर्मू शपथ की।

बना नया इतिहास
खास बात ये है कि दोनों केंद्र शासित प्रदेश देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जंयती के दिन अस्तित्व में आए। पटेल को देश की 500 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय करने का श्रेय है। आज पूरा देश सरदार पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रहा है। 

पांच अगस्त को समाप्त हुआ विशेष दर्जा
विशेष दर्जे को समाप्त करने और इसके विभाजन की घोषणा पांच अगस्त को राज्यसभा में की गई। अब नए कानून के तहत जम्मू-कश्मीर में पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी। वहीं लद्दाख चंडीगढ़ की तरह बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा। जम्मू-कश्मीर की कानून-व्यवसथा और पुलिस पर केंद्र का सीधा नियंत्रण होगा। जमीन भी वहां के निर्वाचित सरकार के अधीन होगी। लद्दाख केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में होगा। 

आज से क्या बदला

  • पहले जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल पद था, लेकिन केंद्रशासित होने से उप-राज्यपाल होंगे।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कम से कम 106 केंद्रीय कानून लागू होंगे। 
  • विधानसभा में अनुसूचित जाति के साथ अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित होंगी। 
  • जम्मू-कश्मीर में पहले विधान परिषद होती थी, वो अब नहीं होगी। 
  • पुलिस व्यवस्था-जम्मू कश्मीर में डीजीपी का मौजूदा पद कायम रहेगा। 
  • लद्दाख में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस वहां के पुलिस का मुखिया होगा।
  • दोनों ही केंद्र शासित राज्यों की पुलिस केंद्र सरकार के निर्देश पर काम करेगी।
  • हाईकोर्ट-फिलहाल जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर और जम्मू बेंच मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत काम करेंगी और लद्दाख के मामलों की सुनवाई भी अभी की तरह ही होगी। चंडीगढ़ की तर्ज पर इसे लागू करने का फैसला लिया गया है कि दोनों केंद्र शासित प्रदेशों का एक ही हाईकोर्ट होगा, लेकिन एडवोकेट जनरल अलग होंगे।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए गृह मंत्रालय ने संयुक्त सचिव के स्तर के एक नए अधिकारी की तैनाती की मांग की है।साथ ही गृह मंत्रालय में पहली बार जम्मू-कश्मीर के अलावा लद्दाख सेक्शन भी खोला गया है।
  • सरकार की योजना के मुताबिक लद्दाख डिवीजन के विकास के लिए केंद्र सरकार जल्दी एक बड़े पैकेज की घोषणा करने जा रही है और उससे पहले लद्दाख डिवीजन में गवर्नर के दो एडवाइजर भी नियुक्त किए जाएंगे।
  • नई व्यवस्था के तहत आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए यूनियन टेरिटरी के अफसर तैनात किए जाएंगे। 
  • केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती-आने वाले दिनों में भी इन दोनों केंद्र शासित राज्यों में केंद्र सरकार के निर्देश पर ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती होगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में फिलहाल जो आयोग काम कर रहे थे, अब उनकी जगह सरकार के आयोग काम करेंगे।
  • विधायिका का कामकाज-दोनों केंद्र शासित राज्यों में एलजी की भूमिका प्रमुख होगी और उन्हीं की अनुमति से महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित राज्य बन जाने के बाद पुलिस और कानून-व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन हो जाएगी। राज्य में भूमि व्यववस्था की देखरेख का जिम्मा निर्वाचित सरकार के तहत ही किया जाएगा। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज की भाषा अब उर्दू नहीं हिंदी हो जाएगी।
  • नए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 107 सदस्य हैं, जिनकी परिसीमन के बाद संख्या बढ़कर 114 तक हो जाएगी। वहीं, विधायिका में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लिए पहले की तरह ही 24 सीट रिक्त रखी जाएंगी।
  • केंद्र सरकार जल्द ही इन दोनों केंद्र शासित राज्यों के सरकारी कर्मचारियों से उनके काम करने के प्राथमिकता की जगह पूछेगी। 
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।