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झारखंड चुनाव : विधायक बनने की चाहत में नेता परिक्रमा में जुटे कार्यकर्ता

झारखंड चुनाव : विधायक बनने की चाहत में नेता परिक्रमा में जुटे कार्यकर्ता

हाईलाइट

  • झारखंड चुनाव : विधायक बनने की चाहत में नेता परिक्रमा में जुटे कार्यकर्ता

रांची, 4 नवंबर (आईएएनएस)। झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ यहां के राजनीतिक दलों के कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के आवासों पर टिकट पाने की होड़ में नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। हालांकि, सभी राजनीतिक दल इस चुनाव में जिताऊ उम्मीदवार को लेकर सजग दिख रहे हैं।

कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं के आवासों पर कार्यकर्ताओं की भीड़ टिकट को लेकर जुटने लगी है।

भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ मानते हैं कि चुनाव के समय कार्यकर्ताओं की इच्छा टिकट पाने की होती है, और इसमें किसी एक को ही टिकट मिलता है। उन्होंने कहा कि भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव की तरह 72-73 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी दलों के साथ मिलकर सब कुछ तय कर लिया जाएगा।

भाजपा के एक नेता के अनुसार, भाजपा अबकी बार 65 पार के साथ इस चुनाव में लोकसभा चुनाव की सफलता को दोहराने की कोशिश में जुटी है, इस कारण टिकट को लेकर कोई गलती करने के मूड में नहीं है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अपने प्रदेश नेताओं को स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि मापदंड पर खरा नहीं उतरने वाले मंत्रियों और विधायकों के टिकट कटेंगे और कोई कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, उसकी पसंद-नापसंद पर न किसी को टिकट मिलेगा और न ही कटेगा।

पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व राज्य से रिपोर्ट लेने के बाद उम्मीदवारों पर फैसला लेगा। सूत्रों का दावा है कि ऐसे में भाजपा कई वर्तमान विधायकों और मंत्रियों के भी टिकट काट सकती है। पार्टी हालांकि अन्य दलों से आए विधायकों को लेकर दबाव में है। पार्टी के एक सांसद हालांकि इसे सही नहीं मानते। उन्होंने कहा कि पार्टी इन विधायकों को लेकर भी किसी दबाव में नहीं है। इन्हें भाजपा में आने के लिए कोई शर्त नहीं रखी गई है। केंद्रीय नेतृत्व सारी स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों के महागठबंधन को लेकर अब तक भले ही पूरी तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन टिकट की आस में कार्यकर्ता प्रदेश स्तर के नेताओं के यहां पहुंचने लगे हैं। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर टिकट पाने वाले नेताओं, कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी हुई है।

विधायक बनने की चाह में कार्यकर्ता अपने नेताओं के द्वारे-द्वारे घूम रहे हैं। इनमें अधिकांश पार्टी के कार्यकर्ता और युवा शामिल हैं। पलामू जिले से झामुमो का एक कार्यकर्ता पिछले तीन दिनों से पार्टी कार्यालय और हेमंत सोरेन के आवास की परिक्रमा कर रहा है। इस कार्यकर्ता को आशा है कि उसे टिकट मिल जाएगा। टिकट के जुगाड़ में कार्यकर्ता आकर्षक बायोडेटा बनाकर भी लाए हैं।

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने बताया, छह नंवबर को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन की मौजूदगी में यह बैठक होगी। इसमें विधानसभा चुनाव और गठबंधन के स्वरूप पर निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद आठ नवंबर को झामुमो पहले चरण के चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करेगा।

कांग्रेस और झामुमो के अलावा अन्य दलों की स्थिति भी ऐसी ही है। कांग्रेस से टिकट की चाह रखने वाले एक नेता ने कहा कि पार्टी के लिए मेहनत किए हैं तो इसके बदले कुछ तो मिलना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केशव महतो कमलेश का कहना है कि टिकट तो दिल्ली में फाइनल होना है, उससे पहले सोमवार को प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक होगी। इसके बाद कुछ तय होना है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।