दैनिक भास्कर हिंदी: गुजरात चुनाव: 'निर्दलीय' लड़ेंगे जिग्नेश मेवाणी, कांग्रेस के साथ पैक्ट !

November 27th, 2017

डिजिटल डेस्क, गांधीनगर। गुजरात में कांग्रेस को समर्थन दे चुके दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने अब विधानसभा चुनावों में 'निर्दलीय' लड़ने का फैसला लिया है। इस बात की जानकारी खुद जिग्नेश ने अपने फेसबुक अकाउंट पर दी। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि 'वो बनासकांठा जिले की वड़गांव-11 सीट से गुजरात का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।' जिग्नेश जिस सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं, वो 'रिजर्व्ड सीट' है और माना जा रहा है कि ये सब कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति के तहत हो रहा है, ताकि बीजेपी को नुकसान पहुंचाया जा सके। बता दें कि इससे पहले माना जा रहा था कि जिग्नेश कांग्रेस में शामिल होंगे और पार्टी की तरफ से ही चुनाव लड़ेंगे, लेकिन अब जिग्नेश ने इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। 

जिग्नेश मेवाणी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कही है। उन्होंने अपनी पोस्ट की शुरुआत में लिखा है 'अब खुद गब्बर मैदान में।' इसके आगे उन्होंने लिखा कि, 'आज 12 बजे वडगांव एक्जिक्यूट मजिस्ट्रेट के ऑफिस में पर्चा भरने जाएंगे। पिछले कुछ महीनों से, खासतौर पर चुनाव की घोषणा होने के बाद अनगिनत आंदोलनकारी साथियों का और युवा वर्ग का यह अनुरोध था बल्कि यह ख्वाहिश थी कि हम इस बार जमकर चुनाव लड़ें और फासीवादी भाजपाईयों के सामने सड़कों के साथ-साथ चुनाव में भी मुकाबला करें और दबे-कुचले तबकों की आवाज़ बनकर विधानसभा में जाएं।'

इसके आगे जिग्नेश ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि 'भाजपा हमारा परम शत्रु है, इसलिए भाजपा को छोड़कर कोई भी पॉलिटिकल पार्टी (या इंडिपेंडेंट केंडिडेट) हमारे सामने अपना कैंडिडेट खड़ा ना करे यह हमारा अनुरोध है। लड़ाई सीधी हमारे और भाजपा के बीच में होने दें। पिछले 22 साल से गुजरात मे जो तानाशाही चल रही है उसके सामने ऊना से लेकर अब तक हमने जो संघर्ष किया है, जो माहौल बनाया है उससे न केवल गुजरात लेकिन पूरे देश की जनता वाकिफ है।'

 

कांग्रेस को होगा फायदा

 

जिग्नेश मेवाणी के निर्दलीय चुनाव लड़ने से कांग्रेस को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि जिग्नेश का चुनावों में निर्दलीय लड़ना, कांग्रेस की सोची समझी रणनीति के तहत ही हुआ है। चुनावों में जिग्नेश के निर्दलीय लड़ने से कांग्रेस बीजेपी के दलित वोटों में सेंध लगा सकती है। जिग्नेश गुजरात में बड़े दलित नेता माने जाते हैं और उनके अकेले लड़ने से कांग्रेस को काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा सबसे बड़ी बात ये है कि एक युवा दलित चेहरा मिलेगा। 

 

ऊना आंदोलन से उभरे थे जिग्नेश

 

गुजरात के ऊना में साल 2016 में एक गाय के शव को उठाने के बाद 4 दलितों की पिटाई कर दी गई थी। जिसके बाद ऊना में दलितों के समर्थन में आंदोलन हुआ था। इसी आंदोलन में जिग्नेश मेवाणी दलितों के बड़े नेता बनकर उभरे थे। गजुरात की 7 फीसदी आबादी दलित है। जिग्नेश का झुकाव हमेशा से कांग्रेस की तरफ रहा है और हाल में उन्होंने कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी