comScore

खादीग्राम : साकार न हो सका बापू का सपना (150वीं गांधी जयंती विशेष)

September 27th, 2019 11:30 IST
 खादीग्राम : साकार न हो सका बापू का सपना (150वीं गांधी जयंती विशेष)

पटना, 27 सितंबर (आईएएनएस)। आजादी के बाद महात्मा गांधी के स्वावलंबन के सपनों और लोगों के रोटी, कपड़ा और मकान के लिए गठित श्रम भारती खादीग्राम को आज खुद दूसरों की मदद की दरकार आन पड़ी है।

अखिल भारत चरखा संघ द्वारा 30 नबंवर 1943 को बिहार के जमुई जिले के नूमर गांव में भागलपुर के सुल्तानगंज के राजा कलानंद सिंह बहादुर से जमीन खरीदकर खादीग्राम भवन की स्थापना की गई थी। महात्मा गांधी की अपील पर डॉ़ राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में 1948 में सर्व सेवा संघ का उदय हुआ। इसके बाद 13 और 14 मार्च 1948 को सर्वसेवा संघ में भारतीय चरखा संघ का विलय हो गया।

गांधीवादी विचारक प्रसून लतांत बताते हैं कि विलय के बाद देशभर में फैली अखिल भारतीय चरखा संघ की संपत्तियां सर्व सेवा संघ के नाम स्थानांतरित हो गईं। साथ ही अखिल भारतीय चरखा संघ की गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी भी सर्व सेवा संघ पर आ गई।

अखिल भारतीय चरखा संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र मजूमदार सर्व सेवा संघ के पहले अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में सर्व सेवा संघ ने 12 मार्च 1952 को श्रम भारती नाम से अपना केंद्र शुरू किया। उनके आह्वान पर देशभर के सवरेदय कार्यकर्ताओं ने अपने श्रमदान से इसे विकसित कर फलों के बगीचे लगाए तथा तालाब आदि बनाए। बाद में यह सवरेदय कार्यकर्ताओं का राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बन गया।

लतांत ने आईएएनएस से कहा, वर्ष 1957 में डॉ़ राजेंद्र प्रसाद और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खादीग्राम के भ्रमण के दौरान धीरेन मजूमदार को खादी के विकास को जारी रखने की सलाह दी थी। यू.एऩ डेवर, आचार्य जी़ बी़ कृपलानी, जयप्रकाश नारायण, जाकिर हुसैन ने यहां आकर कार्यो को सराहा और स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया।

उन्होंने यहां ना केवल तालाब खुदवाए गए, बल्कि गृहिणी विद्यालय और श्रमशाला की भी स्थापना की गई। आचार्य राममूर्ति भी यहां आए और श्रम भारती की कमान संभाली। उनके कार्य संभलते ही आधुनिकता के साथ स्वावलंबन की कवायद शुरू की। खेती को आधार बनाया और कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना करवाई।

आचार्य राममूर्ति के साथ काम कर चुकी मुजफफरपुर की रहने वाली मंजरी सिंह बताती हैं, आचार्य के निधन के बाद हालात तेजी से बदलते गए और वर्तमान में खादीग्राम के हालात यह बयान करने को काफी हैं कि बापू के स्वावलंबन का सपना यहां अधूरा रह गया। अब न यहां कपास की खेती होती, न ही खादी पर मंथन।

उन्होंने बताया कि जंगली इलाके की कुव्यवस्था को देखकर आचार्य राममूर्ति ने जर्मन महिला मैरी बहन के सहयोग से जंगली क्षेत्र के बच्चियों में शिक्षा के लिए गृहिणी विद्यालय की स्थापना 18 अप्रैल, 2004 को किया था। इस विद्यालय में वर्ग एक से लेकर छह तक की पढ़ाई के लिए आवासीय व्यवस्था की गई।

वे बताती हैं कि इस विद्यालय में बच्चियों के रहने, खाने एवं उसे स्वाबलंबी बनाने के लिए सारे पैसों का इंतजाम जर्मन महिला मैरी बहन किया करती थी। वे कहती हैं कि श्रमभारती की स्थापना के बाद बतौर नर्स मैरी बहन खादी ग्राम घूमने आई थी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 तक 1000 से ज्यादा बच्चियों को शिक्षा देकर स्वावलंबी बना चुका यह विद्यालय पिछले चार साल से बंद है। इस विद्यालय के बंद होते ही न केवल आदिवासी बच्चियां शिक्षा से मरहूम हो गईं, बल्कि आसपास के कई परिवारों की आजीविका भी छिन गई, जो विद्यालय से जुड़े थे।

मंजरी ने आईएएनएस को बताया कि उन दिनों इस विद्यालय में सिलाई-कढ़ाई, रसोई, गार्डेन, संगीत, पाकशाला सहित अन्य की जानकारी देकर बच्चियों को स्वावलंबी बनाया जाता था।

स्थानीय लोग कहते हैं कि जमुई में श्रम भारती खादी ग्राम में तब गांधीवादी लोग इलाके में आते-जाते थे और खेती-किसानी के नए-नए तरीके बताते थे।

स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए श्रमभारती खादीग्राम में वर्ष 1995 में केंद्रीय नगर एवं आवास मंत्रालय ने सस्ते मकान के लिए सामग्री बनानी शुरू की। कैमूर से लेकर किशनगंज तक के लोग इससे लाभान्वित हुए। हुडको ने वर्ष 2013 में इसे बंद कर दिया। परिसर में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम भी पिछले पांच वर्षो से प्रभावित हैं। कई महीनों से कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मियों को वेतन तक नहीं दिया गया है।

सर्व सेवा संघ के संयोजक रमेश पंकज कहते हैं कि यहां कृषि विज्ञान केंद्र शुरू किए जाने से पिछले 20-25 सालों से खादीग्राम उजड़ गया है, घर टूट गए हैं, छप्परों के खपरैल गायब हो गए हैं। कई घरों में घास उग आए हैं।

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष महादेव विद्रोही कहते हैं कि सर्व सेवा संघ अब श्रम भारती का जीर्णोद्घार करेगी। इस संदर्भ में आवश्यक फैसले भी लिए गए हैं। गृहिणी विद्यालय को फिर से शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि खादीग्राम को सर्व सेवा संघ फिर से उसी स्वरूप मे लाना चाहती है जैसा स्थापना के समय थी। खादीग्राम की गतिविधियों को सुचारु एवं सक्रिय रूप से चलाने के लिए एक संचालन समिति का गठन किया गया है।

विद्रोही ने कहा, खादीग्राम में फिर से ऐसी गतिविधियां संचालित हों, जिससे यह सर्वोदय का जीवंत केंद्र बन सके, तभी यह बापू के स्वालंबन के सपने को साकार कर सकेगा।

कमेंट करें
DyarF
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।