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महाराष्ट्र चुनाव : क्या इतिहास रच पाएंगे देवेंद्र फडणवीस?

October 19th, 2019 12:10 IST
महाराष्ट्र चुनाव : क्या इतिहास रच पाएंगे देवेंद्र फडणवीस?

हाईलाइट

  • महाराष्ट्र चुनाव : क्या इतिहास रच पाएंगे फडणवीस?

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जितने भी दल, जितने भी उम्मीदवार और जितने भी स्टार प्रचारक हिस्सा ले रहे हैं, उनमें से यदि सबसे ज्यादा दांव किसी का लगा है, तो वह हैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। इस चुनाव में यदि भाजपा 122 से अधिक सीटें जीतती है तो फडणवीस इतिहास रचेंगे, लेकिन यदि पार्टी इस आंकड़े से पीछे रह जाती है तो मुख्यमंत्री बन जाने के बावजूद उनकी राजनीतिक राह कठिन हो जाएगी।

फडणवीस इस बात को समझते हैं, और इसी कारण वह प्रचार में दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। अब तक वह 50 चुनावी सभाएं कर चुके हैं, और 19 अक्टूबर तक 58 सभाएं कर लेंगे।

इस तरह 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पूरे देश का तूफानी दौरा किया था, उसी तरह महाराष्ट्र में सरकार की बागडोर दूसरी बार संभालने के लिए कृतसंकल्प मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पिछले 75 दिनों से राज्य के कोने-कोने में नॉनस्टॉप चुनाव प्रचार कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के करीब दो महीने पहले से सक्रिय फडणवीस करीब-करीब हर विधानसभा का दौरा कर चुके हैं। दरअसल, 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में इस बार भाजपा को 122 सीटों से आगे ले जाने की जिम्मेदारी केवल और केवल देवेंद्र फडणवीस के ही कंधे पर है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वस्तुत: 2014 के विधानसभा चुनाव में राज्य के किसी भी नेता को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया था। सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर सहयोगी शिवसेना के साथ गंभीर मतभेद के कारण दोनों भगवा दलों का गठबंधन भी नहीं हो सका था। पिछले चुनाव में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भाजपा को 127 से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं थे। दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे। भाजपा अपने दम पर 122 सीटें जीतने में कामयाब रही थी और बहुमत से केवल 23 सीट पीछ रह गई। सरकार बनाने के लिए उसे मजबूरन 63 सीटें जीतने वाली शिवसेना के साथ चुनाव बाद गठबंधन करना पड़ा था। क्रमश: 41 और 40 सीटें जीतने वाली कांग्रेस और राकांपा को विपक्ष में बैठना पड़ा था।

इसके विपरीत 2019 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदला हुआ है। इस बार भाजपा शिवसेना का चुनावी गठबंधन है। भाजपा निर्विवाद बड़े भाई की भूमिका में है, जबकि शिवसेना छोटे भाई के किरदार में है। भाजपा 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि शिवसेना ने 124 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने खुद घोषणा की है कि चुनाव देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है। जाहिर है, इस परिस्थिति में मुख्यमंत्री पर इस बार 122 सीटों में इजाफा करने की गंभीर जिम्मेदारी है।

चुनाव के बाद अगर भाजपा 130 से 140 सीटें जीतती है तो उसका श्रेय निश्चत रूप में फडणवीस को जाएगा और राज्य में उनके नेतृत्व को चुनौती देने वाला कोई नेता नहीं होगा। लेकिन अगर भाजपा की सीटें 122 से कम हो गईं तो मुख्यमंत्री के विरोधी निश्चित रूप से सिर उठाएंगे। खासकर जिन सीनियर नेताओं के टिकट काटे गए हैं, वे देवेंद्र का मुखर विरोध करेंगे। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने राज्य विधानसभा में घोषणा कर दी थी कि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आ रही है।

इसके बाद पहली अगस्त से फडणवीस महाजनादेश यात्रा पर निकल गए। तीन चरणों वाली महाजनादेश यात्रा की आगाज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में अमरावती के गुरुकुंज मोजरी से शुरू हुई। महाजनादेश यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने 62 जनसभाओं को संबोधित किया। नौ अक्टूबर के बाद गठबंधन के उम्मीदवीरों के चुनाव प्रचार में फडणवीस अब तक 50 से ज्यादा जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं। 19 अक्टूबर की शाम तक वह 58 जनसभाओं को संबोधित करेंगे।

भाजपा इस बार चुनाव को लेकर इतनी ज्यादा गंभीर है कि राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुल नौ सभाएं हो रही हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 18 जनसभाएं कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 13 सभाएं, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा छह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तीन सभाएं कर चुके हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में शुरू से मराठा नेताओं का दबदबा रहा है, इसके बावजूद ब्राह्मण समुदाय से आने वाले फडणवीस ने मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा करके अपने आप को राज्य का सबसे लोकप्रिय नेता साबित किया है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और राकांपा के कई बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल करके उन्होंने विपक्ष को बहुत कमजोर कर दिया है।

1960 में महाराष्ट्र राज्य के अस्तित्व में आने के बाद राज्य में 17 मुख्यमंत्री पदासीन हुए। लेकिन उनमें से केवल दो ही अपना कार्यकाल पूरा कर सके। उनमें से एक नागपुर की दक्षिण पश्चिम सीट से निर्वाचित देवेंद्र फडणवीस हैं। उनसे पहले वसंत राव नाईक ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए थे। यानी फडणवीस ने इतिहास रचा है और इस इतिहास से आगे बढ़ने के लिए वह फिर से नागपुर की दक्षिण पश्चिम सीट से मैदान में हैं।

पिछले पांच साल के दौरान कई बार लगा कि मराठा नेता ब्राह्मण मुख्यमंत्री को हटाना चाहते हैं, मगर फडणवीस इससे घबराए नहीं और हमेशा आंदोलनकारियों से बातचीत को तैयार रहे। खासकर उन्होंने मराठा आंदोलन को जिस कुशलता से संभाला, उसके बाद उन्होंने साबित कर दिया कि वह प्रशासनिक दृष्टि से दूसरे नेताओं से बीस ही हैं।

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डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम ने क्वार्टर फाइनल में विश्व की नंबर 2 टीम ऑस्ट्रेलिया को हरा कर सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाकर एक नया इतिहास रच दिया है। 41 सालों के बाद भारतीय टीम सेमीफाइनल तक पहुची है। अब जानते है उन महिला खिलाड़ियो के बारे में जिन्होंने टीम को जिताने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।  

रानी रामपाल ( कैप्टन)

रानी रामपाल भारतीय हॉकी टीम की कैप्टन हैं। जिन्हें भारतीय हॉकी टीम की रानी भी कहा जाता है। रानी रामपाल हरियाणा के शाहबाद मारकंडा की रहनी वाली हैं। रानी एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं और उनकी जिन्दगी संघर्ष भरी रही है। रानी के घर में उनके पिता और दो बड़े भाई हैं।सबसे बड़े भाई बढ़ई हैं और दूसरे भाई किसी दुकान पर काम करता हैं। इसके साथ ही रानी के पिता एक तांगा चलाते हैं। बता दें कि रानी ने 14 साल की उम्र में ही अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेल लिया था। और हाल ही में रानी की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम ने फिर कमाल कर दिखाया है।  

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सविता पूनीया
हरियाणा की सविता पूनीया भारतीय हॉकी टीम की गोलकीपर हैं। सोमवार को टोक्यो ओलंपिक में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खड़ी रहीं और भारत को जीत दिलाई। दुनिया की दूसरे नंबर पर आने वाली महिला हॉकी टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत ने अपना उच्च प्रदर्शन दिखाते हुए पहले क्वार्टर में ऑस्ट्रेलिया को आगे नही बढ़ने दिया और दूसरे क्वार्टर में अच्छा प्रदर्शन करते हुए गोल भी मारा। सविता पूनीया मैच की हीरो रहीं क्योंकि उन्होंने सात पेनल्टी कॉर्नर के बावजूद ऑस्ट्रेलिया का गोल नहीं करने दिया। 

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वंदना कटारिया 
टोक्यो ऑलंपिक में दक्षिण अफ्रीका के साथ हुए मुकाबले में फॉर्वर्ड खिलाड़ी वंदना कटारिया ने जोरदार परफॉर्मेस दिया और 3 गोल दागकर भारत की जीत को तय किया। वंदना कटारिया पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिन्होंने ओलंपिक मैच में हैट्रिक जमाई और शानदार खेल का प्रदर्शन कर भारतीय महिला हॉकी टीम के क्वालीफाई की उम्मीद को जिंदा रखा। वंदना के साथ नेहा ने भी भारत की जीत के लिए नींव रखी। 

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मोनिका मलिक ने 2013 में जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीता और 2013 में ही आयोजित तीसरी एशियन चैम्पियनशिप ट्रॉफी में रजत पदक जीता। 2014 में भोपाल में हुए चौथे सीनियर नेशनल गेम्स में रजत पदक जीता। इस प्रतियोगिता में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब भी मिला। 2014 में दक्षिण कोरिया में आयोजित 17वें एशियन गेम्स में उन्होंने कास्य पदक जीता। मोनिका ने कहा था कि यह पहली बार है जब भारतीय टीम को ओलंपिक में खेलने का मौका मिला। और अब टीम ने ओलंपिक का अनुभव भी हासिल कर लिया है, जिसका फायदा उन्हें टोक्यो ओलंपिक में मिल सकता है। मोनिका इस ओलंपिक में उसी तजुर्बे का फायदा उठाती नजर आ रही हैं। मोनिका मलिक अर्जेंटीना की प्रसिद्ध खिलाड़ी आइमर को अपनी आदर्श मानती हैं। 

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तारा का यह लहंगा डिजाइनर ऋतू कुमार के लेबल का है। इस लहंगे के ब्लाउज में डीप नैकलाइन और मैट गोल्ड कढ़ाई का भी काम हुआ है। इसकी स्लीव्स छोटी और डिजाइनर हैं। इसके दुपट्टे में भी कढ़ाई का खूबसूरत काम किया गया है। 

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तारा ने इस लहंगे के साथ गोल्ड के इयररिंग्स और चूड़ियां कैरी की हैं जो उनके लुक को और भी एलिगेंट लुक दे रही हैं। उन्होंने बालों का बन बनाया हुआ है जिसमें फूल लगे हुए हैं। इसके साथ तारा ने न्यूड मेकअप किया है और होठों पर न्यूड लिप्स्टिक लगाई हुई है और माथे पर एक छोटी सी बिंदी भी तारा ने लगाई है।

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इस ऑरेंज कलर के रॉयल लुक वाले लहंगे की कीमत 81,900 रुपये है और इसे डिजाइनर ऋतु कुमार की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है।
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तारा सुतारिया के अगर करियर की बार करें तो इन्होंने बॉलीवुड में अभी तक दो फिल्में की हैं। तारा की पहली फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर थी और दूसरी फिल्म थी मरजावां जिसमें तारा अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ नजर आई थीं।

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 खबर है कि तारा जल्द ही अपनी नई फिल्म एक विलेन रिटर्न्स और तड़प में नजर आने वाली हैं। बता दें कि फिल्म एक विलेन रिटर्न्स में तारा के साथ जॉन अब्राहम और अर्जुन कपूर दिख सकते हैं। जबकि फिल्म तड़प में तारा के साथ सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी दिख सकते हैं।