दैनिक भास्कर हिंदी: नागरिकता बिल का विरोध, महाराष्ट्र के आईपीएस अधिकारी का इस्तीफा

December 12th, 2019

हाईलाइट

  • महाराष्ट्र कैडर के एक आईपीएस अधिकारी CAB के विरोध में इस्तीफा दे दिया
  • आईपीएस अधिकारी ने इस विधेयक को 'सांप्रदायिक और असंवैधानिक' बताया
  • लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी इस विधेयक को पास कर दिया गया है

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र कैडर के एक आईपीएस अधिकारी अब्दुर रहमान ने बुधवार को नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में इस्तीफा दे दिया। इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस अब्दुल रहमान ने इस विधेयक को 'सांप्रदायिक और असंवैधानिक' बताया। बता दें कि लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी इस विधेयक को पास कर दिया गया है। बिल के पक्ष में 125 जबकि विरोध में 105 वोट पड़े।

अब्दुर रहमान को इस साल की शुरुआत में महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के प्रमुख के तौर पर तैनात किया गया था। रहमान ने एक बयान जारी कर कहा कि वह गुरुवार से कार्यालय नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, 'यह बिल संविधान की मूल विशेषता के खिलाफ है। मैं इस बिल की निंदा करता हूं। मैंने कल से ऑफिस नहीं आने का फैसला किया है। मैं आखिरकार सेवा छोड़ रहा हूं। रहमान ने बयान में कहा, 'यह विधेयक भारत के धार्मिक बहुलवाद के खिलाफ है। मैं सभी न्यायप्रिय लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे लोकतांत्रिक तरीके से इस विधेयक का विरोध करें। यह संविधान की मूल विशेषता के खिलाफ है।'

रहमान ने कहा, 'बिल के पारित होने के दौरान, गृहमंत्री अमित शाह ने गलत तथ्य, भ्रामक जानकारी और गलत तर्क पेश किए।' उन्होंने कहा, 'बिल के पीछे का विचार मुसलमानों में भय पैदा करने और राष्ट्र को विभाजित करने के लिए है।' रहमान ने कहा कि विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है और इसकी मूल विशेषता के खिलाफ है। उन्होंने कहा, 'यह धर्म के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करता है। यह भारत में 200 मिलियन मुसलमानों को गिराने का काम है।'

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि रहमान ने अगस्त में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था और वह अपने आवेदन पर निर्णय का इंतजार कर रहे थे। बता दें कि राज्यसभा से बुधवार को नागरिकता (संशोधन) बिल 2019 पास हो गया। बिल के पक्ष में 125 जबकि विरोध में 105 वोट पड़े। लोकसभा में बिल के पक्ष में वोटिंग करने वाली शिवसेना ने राज्यसभा में वॉकआउट किया और वोटिंग में शामिल नहीं हुई। अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।