comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

कुलगाम में आतंकियों ने की 1 व्यक्ति की हत्या, गांदरबल में विस्फोट, कई घायल

June 18th, 2018 14:53 IST

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। कभी सेना के जवानो तो कभी आम नागरिकों को ही अपना निशाना बना रहे हैं। इस बार आतंकियों ने कुलगाम के कीलम गांव में एक आम नागरिक को निशाना बनाया और गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। दूसरी ओर कश्मीर के गांदरबल में हुए एक बम धमाके में कई लोग घायल हो गए।

दरअसल आतंकियों ने मोहम्मद इकबाल कावा नाम के व्यक्ति को गोली मारी थी जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया था। जगलत मंडी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। फिलहाल पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

वहीं रविवार की शाम को गांदरबल के मनसाबल पार्क में कम तीव्रता का विस्फोट हुआ। जिसमें कई आम नागरिक घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि ये ब्लास्ट एक डस्टबिन में हुआ है। पुलिस ने डस्टबिन में पटाखें की वजह से धमाके की बात कह रही है। हालांकि घटना के बाद तुरंत घायलों को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। वहीं पुलिस ने विस्फोट की जांच भी शुरू कर दी है। ब्लास्ट को लेकर ये भी कहा जा रहा है कि सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए उन पर ग्रेनेड से हमला किया गया था, लेकिन निशाना चूकने की वजह से नागरिक हमले की चपेट में आ गए। 

ईद पर सुरक्षाबलों पर की गई थी पत्थरबाजी 

गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को ईद के मौके पर श्रीनगर और अनंतनाग में नमाज़ के बाद सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी की गई थी। आतंकी संगठन आईएस और पाकिस्तान के झंडे भी लहराए गए थे। इस दौरान झड़प में एक युवक की मौत हो गई थी। आतंकियों ने सेना के जवान औरंगजेब और पत्रकार शुजात बुखारी की भी हत्या कर दी गई। नौशेरा में पाकिस्तान की फायरिंग में 21 वर्षीय जवान विकास गुरुंग शहीद हो गए थे।

रमजान के लिए लागू सीजफायर खत्म

रमजान को लेकर जम्मू-कश्मीर में लागू किए गए सीजफायर को केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है। मोदी सरकार ने सीजफायर को सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन नाम दिया था। इसे 17 मई 2018 को लागू किया था। इसके लागू होते ही आतंकियों के खिलाफ जारी ऑपरेशन ऑल आउट पर रोक लगा दी गई थी। सरकार के इस कदम के बाद भी रमजान के महीने में 29 दिनों में करीब 59 छोटी-बड़ी आतंकी घटनाएं हुईं। सीजफायर की घोषणा के बाद ग्रेनेड हमला भी चार गुना बढ़ा। रमजान के दौरान आतंकियों ने 20 ग्रेनेड हमले किए। 


 

कमेंट करें
CAZ4X
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।