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अलवर लिंचिंग : तीन दिन बाद वसुंधरा सरकार ने गलती मानी, 5 पुलिसकर्मी पर गाज

July 24th, 2018 15:17 IST
अलवर लिंचिंग : तीन दिन बाद वसुंधरा सरकार ने गलती मानी, 5 पुलिसकर्मी पर गाज

हाईलाइट

  • राजस्थान के अलवर जिले में हुई मॉब लिंचिंग की घटना के तीन दिन बाद राज्य की वसुंधरा सरकार ने अपनी गलती मान ली है।
  • मामले में 5 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
  • थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष सुभाष शर्मा को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया।

डिजिटल डेस्क, अलवर। राजस्थान के अलवर जिले में हुई मॉब लिंचिंग की घटना के तीन दिन बाद राज्य की वसुंधरा सरकार ने अपनी गलती मान ली है। मामले में 5 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। घटना के बाद लापरवाही बरतने के मामले में थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष शर्मा को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया। इसके अलावा एएसआई मोहन चौधरी समेत उस समय ड्यूटी पर मौजूद तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है।


बता दें कि यह मॉब लिंचिंग की घटना राजस्‍थान के अलवर जिले के रामगढ़ में हुई थी। इस घटना में भीड़ ने गौ तस्करी के आरोप में पीट-पीटकर रकबर खान को घायल कर दिया था। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी बरामद गायों को गौशाला पहुंचा दिया था, मगर रकबर को प्राथमिक उपचार के लिए न भेजकर सीधे थाने ले आई थी। पुलिस की यही लापरवाही रकबर की मौत का कारण मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि अगर सही समय पर रकबर को अस्पताल ले जाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।

एडीजी अनार के रेड्डी के नेतृत्व में अलवर गई पुलिस टीम ने अपनी पूरी रिपोर्ट राजस्थान के डीजीपी को सौंप दी है। उसके बाद प्राथमिक रूप से पुलिसकर्मियों को लापरवाही में दोषी मानते हुए सजा दी गई है। मामले की जांच कर रहे पुलिस के आला अधिकारियों ने घटनास्‍थल का दौरा भी किया और पूरे घटना की जानकारी ली। वहीं अब अलवर कांड की जांच जयपुर के एसपी क्राइम और विजिलेंस करेंगे और तीन दिनों में यह रिपोर्ट राजस्थान सरकार को दी जाएगी।

विधायक बोले- सिर्फ चार-पांच थप्पड़ ही मारे थे
रामगढ़ के बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने माना है कि उनके ही कार्यकर्ताओं ने रकबर खान को पकड़ा था। विधायक ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने रकबर को सिर्फ चार-पांच थप्पड़ ही मारे थे और उसके बाद पुलिस को सौंप दिया था। इसके बाद उसकी हार्ट अटैक से मौत हुई या फिर कैसे? ये तो जांच का विषय है। विधायक ने कहा है कि गाय हमारी माता है और मां की कोई तस्करी करे तो लोगों में गुस्सा जाहिर है। ये बड़े पैमाने पर गौ तस्करी करते हैं, लेकिन पुलिस इनको कुछ नही करती है।

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bhavarlal March 19th, 2020 23:33 IST

rajsthan hindi

bhavarlal March 19th, 2020 23:33 IST

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bhavarlal March 19th, 2020 23:33 IST

hindi

anil sharma July 24th, 2018 12:34 IST

go taskar to Likh diya sukiryaaa patrika ....taskar tha TO ANJAM Yhi hon TH kya insan or janvar ki jaan me farak hota h

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।